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कविता : मेरा ये दिल दीवाना

वो प्यार की कहानी , चाहत का वो फसाना
खोया है उसमें अब तक, मेरा ये दिल दीवाना

बीते बरस कई पर, कुछ भी बदल सका न
यादों के उस भंवर से , दिल ये निकल सका न
आया न रास दिल की , बातों में मेरा आना
खोया है उसमें अब तक, मेरा ये दिल दीवाना

हैं आस सारे टूटे, उम्मीदें टूटी टूटी
धड़कन भी मंद है और है सांस टूटी टूटी
हर सांस पर है भारी, दिल का मेरे लगाना
खोया है उसमें अब तक, मेरा ये दिल दीवाना

आंखें बुझीं हैं हरदम रोता हुआ ये दिल है
आसान मौत लगती , जीना हुआ मुश्किल है
मंजिल से भटके दिल को मिलता नहीं ठिकाना
खोया है उसमें अब तक, मेरा ये दिल दीवाना

निकलूं मैं इस बला से , गर रास्ता हो कोई
जो चैन दे दे दिल को ऐसी दवा हो कोई
परेशान दिल करे एक, दूजा करे जमाना
खोया है उसमें अब तक, मेरा ये दिल दीवाना

विक्रम कुमार
मनोरा, वैशाली

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