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कविता : सादगी

शालीनता जब हो विचार में,
सादगी छा जाए व्यवहार में।

जीवन व्यतीत हो सदाचार में।
खुशियां बरसे घर परिवार में।

महानता छुपा है शिष्टाचार मे,
कमी ना रखें आदर सत्कार मे।

बहुत अच्छा लगता मुझे जब,
घर लौटते हम पर्व त्यौहार में।

विश्वास जम जाए व्यापार में,
पारदर्शिता हो अगर सरकार में।

महिलाएं कितनी अच्छी लगती,
तड़क-भड़क रहित श्रृंगार में।

गोपेंद्र कुमार सिन्हा गौतम
औरंगाबाद बिहार

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