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कविता : तेरे कदमों की धूल बन जाये

ऐ मालिक तेरी तस्वीर. हमारे दिल में बन जाये।
कोई तो तेरा वजूद तेरे. सहारे का उम्र भर बन जाये।
प्यास सिर्फ तेरी दुआ की हो. तुम्हारे अक्स में बस जाये।
ये रूह तेरे कदमों को चूम. भले जमीं पे खाख बन जाये।
तेरे बनाये जिस्म में नेकदिल की. सांसे धड़कन बन जाये।
जो जिंदगी भर तेरी बंदगी में. तेरी पहचान बन जाये।
जब तक तेरे इस जहाँ में. वक्त का रिश्ता इंसान से चलेगा।
गम ओ सितम का दौर. तकदीर का जरिया बन पलेगा।
खामोश तंहा इंसान तेरी. दरगाह में सुकून पाने आयेगा।
तेरा माबूद हर मंजिल में. इबादत के जरिये नजर बन जाये।
आज तेरी तस्वीर के. सामने मिल कलाम पढ रहे खुदा ।
हमारे इस इकरार से रहमत. तू बक्श सच्चे इंसा हो न पाये जुदा।
ऐ मालिक तेरी जिंदगी. इक दिन तुम्हें ही सौंप हम जाये।
ये हमारी तुमसे छोटी सी इलतजा. जन्नत हमारी नशीब बन जाये।
भारती अपनी पलकों में. तस्वीर सजदा कर अश्क बहाये।
तेरी इस दुनियां में तेरे. सिवा कोई न अपनाये।
ऐ मालिक तेरी तस्वीर .बस कदमों की धूल बन जाये।

मंगल व्यास भारती
गढ़ के पास , चूरू राजस्थान

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