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बाहर से आने वाले 15 दिन एकांतवास गृह में गुजारकर कोरोना को गांव से दूर रखें

दिल्ली पंजाब गुजरात हरियाणा महाराष्ट्र झारखंड तमिलनाडु उत्तर प्रदेश पश्चिम बंगाल आदि राज्यों के शहरों से एक दूसरे राज्यों में आने-जाने वाले भाइयों बहनों मित्रों आप सबसे निवेदन है आप अपने परिवार और गांव समाज की चिंता करते हुए हर हाल में 15 दिन एकांतवास गृह में गुजारें।आप सभी बखूबी जानते हैं पिछले दिनों किस प्रकार से किसी गांव में चेचक हो जाने पर लोग अपने घर से किसी भी परिस्थिति में तब तक बाहर नहीं जाते थे जब तक उस गांव से पूरी तरह चेचक समाप्त नहीं हो जाता था।और जहां कहीं भी कोई भूल से भी अपने नैहर-ससुराल,हित-जन के घर चला जाता था वहां भी चेचक का कहर बरपाने लगता था।
यह कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी चेचक से लाख गुना खतरनाक और जानलेवा है क्यों किया संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने पर तुरंत संक्रमित कर देता है इसमें जान जाने के भी खतरा होता है।तो फिर आप सब क्यों अपने साथ-साथ परिवार और गांव वालों को भी जानलेवा खतरा में धकेलने का प्रयास कर जन्म जन्म के लिए बदनामी उठाने का रिस्क ले रहे हैं। कृपया कर भावुकता और परिवार मोह में अपने साथ अपने परिवार को मौत के मुंह में मत ढकेलें। एक बार यह वायरस आपके गांव पड़ोस में कदम रख देगा तो फिर उसकी भयावहता का अनुमान नहीं लगा सकते।इसके लिए अभी तक कोई ऐसा इलाज नहीं उपलब्ध है जो आपको सौ फीसदी स्वस्थ होने की गारंटी दे।इसके इलाज और जांच पर भी बहुत खर्च है जो आपको आर्थिक रूप से बिल्कुल तोड़ देगा।गांव के गांव शमशान और कब्रगाह बन जाएंगे।इस परिस्थिति को समझें। आप लोग देश दुनिया देखे हैं और आज समाचार पत्रों में टेलीविजन पर रेडियो से लगातार लोगों को जागरूक किया जा रहा है आप खुद इसके बारे में जानकर भी यह जोखिम मत उठाएं।
बहुत दुख:द स्थिति उत्पन्न हो रहा है।हर गांव में लोग लगातार देश के कोने-कोने से आ रहे हैं।लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ प्रशासनिक लापरवाही भी देखने को मिल रहा है।प्रशासन के कुछ लोग जरूरतमंदों को सड़क पर निकलने पर बिना कारण जाने डंडे बरसाने में लगे हुए हैं। सरकार से मांग है ऐसे प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारीर्मी को चिन्हित कर दंडित किया जाए। सबसे खेद जनक स्थिति तो तब उत्पन्न हो रही है जब गांव और जिले के बाहर से आने वाले लोगों को जो लोग उन्हें एकांतवास गृह में रहने के लिए समझा बुझा कर प्रेरित कर रहे हैं वे खुद बाहर से आने वाले व्यक्ति समूह के परिवार के नफरत का शिकार बन जा रहे हैं।कुछ लोग उनके तरफ से ही भला बुरा कहने लग रहे हैं।बहुत दुखद स्थिति है।जो व्यक्ति रोजी रोटी के जुगाड़ में साल-साल भर अपने गांव और राज्य से बाहर रह सकते हैं। वे आज अपने परिवार समाज और देश के लोगों के लिए 10-15 दिन अपने गांव पंचायत में एकांतवास नहीं करना चाहते हैं।वह भी जब उनके परिवार समेत संपूर्ण देशवासियों के स्वास्थ्य ही नहीं जान जाने का सवाल है।
बाहर से आने वाले सभी लोगों से मेरा हाथ जोड़कर विनती है कम से कम 15 दिन अपने परिवार और आम ग्राम वासियों से कटकर सरकार द्वारा बनाए गए स्वास्थ्य शिविर में एकांतवास करें।वहां आपको हर प्रकार की सुविधा प्रदान की जाएगी।अगर सरकार नहीं प्रदान करेगी तो हम सब लोग सामाजिक स्तर पर मिलकर आप सब को सभी सुविधाएं मुहैया कराएंगे।हमारा ग्रामीण समाज आज भी इतना सक्षम है की सैकड़ों लोगों को सालों भोजन पानी दवा मुफ्त उपलब्ध करा सकता है।वहां आपके मनोरंजन के लिए भी व्यवस्था किया जाएगा।साथ ही आप वहां से मोबाइल फोन से अपने परिवार के सदस्य जनों मित्रों से बातचीत कर सकते हैं। जिससे आपका इस समय आसानी से कट जाएगा वैसे भी हम सभी गांव वाले भी तो अपने-अपने घरों में एक दूसरे से अलग रह कर एकांतवास के जिंदगी ही यापन कर रहे हैं बस आपको अपने घर की जगह निर्धारित स्थल पर यही काम करना है।आपके घर का बना हुआ खाना भी वहां उपलब्ध करवाया जा सकता है कृपया कर मानवहित में देश हित में समाज हित में गांव हित में परिवार हित में बाहर से आने पर कम से कम 15 दिन एकांतवास करें और स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें,समय पर दवा ले दिन में अधिक से अधिक बार साबुन सैनिटाइजर से हाथ धोते रहें। बाहर से काम करके लौटने वाले लोग के परिवारजनों से भी निवेदन है जिनके घर बाहर से कोई आते हैं।उन्हें एकांतवास गृह में ठहरने के लिए कहें।ताकि आपके परिवार समेत समूचा गांव कोरोनावायरस के संक्रमण से बच सके।अभी तक जहां भी संक्रमण हुआ है उसमें बाहर से आने वाले लोगों के कारण ही हुआ है। इस कारण हम सभी को अधिक से अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।
गांव घरों में रहने वाले आम लोगों से भी निवेदन है वह भी बेवजह अपने घरों से बाहर ना निकले अपने घरों में अपने परिवारजनों से अलग अलग दूरी बना कर रहे बार-बार आप लोग भी साबुन से हाथ धोएं। आपके परिवार से अगर कोई व्यक्ति बाहर आवश्यक वस्तु लेने जाए तो कृपया कर घर में प्रवेश करने से पहले अपने कपड़े उतार कर बाहर ही साफ करके धूप में सूखने के लिए डाल दें और खुद साबुन से अच्छी तरह से स्नान कर अपने घर में प्रवेश करें जिससे कि आपका परिवार और गांव समाज संक्रमण से पूरी तरह से सुरक्षित रहे।
मैं तमाम देश के जिम्मेवार नागरिकों से अनुरोध करना चाहता हूं अगर आपके आस पड़ोस में कोई व्यक्ति लॉक डाउन की वजह से परेशानी में हो भुखमरी का शिकार हो रहा हो तो उसकी अभिलंब मदद करें और इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन और सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए हेल्पलाइन पर अवश्य दें ताकि समय रहते हैं उनको सरकारी सुविधा का लाभ भी मिल सके। अगर आपके गांव में या आस-पास कोई वैसा व्यक्ति जो अभी तक बाहर काम कर रहा था वहां से लौट कर आया हूं और वह एकांतवास गृह में रहने के लिए तैयार नहीं हो और स्वास्थ्य जांच नहीं कराया हो तो इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन और सरकार के हेल्पलाइन पर देना सुनिश्चित करें यह आप सभी का और हमारा परम कर्तव्य है आज मान्यता दिखाने के साथ-साथ राष्ट्रभक्ति दिखाने का अवसर है। जिस तरह से दुनिया के कुछ देशों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने के उपरांत आज इस भयावह कोरोनावायरस संक्रमण से ग्रसित हो गए हैं उससे हमें शिक्षा लेना चाहिए।आज उन देशों में लाखों लोग इस संक्रमण से ग्रसित हो चुके हैं और हजारों अकाल मौत के शिकार हो रहे हैं उनके मृत शरीरों को ठिकाना लगाने को कोई तैयार नहीं है। अगर इस स्थिति से अपने परिवार को गांव समाज और देश को बचाना चाहते हैं तो हर हाल में प्रत्येक नागरिक अपने अपने कर्तव्यों का पूरी जिम्मेवारी से निर्वाह करें।
हम सभी अपने देश में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं के स्थिति को भली-भांति जानते हैं जब दुनिया के तमाम विकसित देश हर प्रकार के स्वास्थ्य सुविधाओं से परिपूर्ण है वहां का हाल बेहाल है तो दुनिया के सबसे बड़ी जनसंख्या में दूसरा स्थान रखने वाला आपका मुल्क का क्या हाल होगा अगर संक्रमण ग्राम स्तर तक पहुंच गया तो। सरकारी अपने स्तर पर जितना हो सकता है उससे बढ़-चढ़कर इस बीमारी से लड़ने के लिए तैयारियां कर रही है और बहुत हद तक कर दी गई हैं। लॉक डाउन से प्रभावित लोगों को भी हर प्रकार के सुविधा देने की कोशिश की जा रही है लेकिन इसी बीच व्यापक स्तर पर देश में पलायन शुरू हो गया।जिससे लोग एक जगह स्थिर नहीं है इस कारण उन्हें सुविधा देने में प्रशासन को परेशानी हो रही है। जैसे ही लोग स्थाई रूप से किसी निर्धारित शिविर में रहने लगेंगे उन्हें हर प्रकार की सुविधा समय पर उपलब्ध करवाने के लिए प्रशासन तत्पर है।
आप में से कुछ नागरिकों का सवाल है कि सरकार ने जब विदेश में रहने वाले साधन संपन्न लोगों को वहां से निकालकर उनके घर पहुंचा सकती है तो फिर हम सभी मेहनत मजदूरी करके कमाने खाने वाले लोगों को उनके गंतव्य तक क्यों नहीं पहुंचा रही है।आपका सवाल बिल्कुल जायज है।आप सभी जानते हैं विदेश में बहुत ही सीमित मात्रा में लोग रहते हैं और उन्हें भी तब उन देशों से लाया गया जब संक्रमण शुरुआती चरण में था। लेकिन देश में लॉक ड़ाउन की घोषणा उस समय की गई।जब संक्रमण तेजी से अपना पांव पसारने की कोशिश करने लगा था।इस कारण आप सभी को समय पर गंतव्य तक जाने कि न तो घोषणा की जा सकी और नहीं पहुंचाने का प्रबंध किया जा सका।सरकार चाहती थी आप जहां है वही आपको हर प्रकार की सुविधा सरकार द्वारा निर्धारित लॉक डाउन समय सीमा तक हर हाल में उपलब्ध करवा दिया जाए।लेकिन इसी बीच भारी मात्रा में एक राज्य से दूसरे राज्य में पलायन शुरू हो गया।जिसके कारण देश की सड़कों पर हमारे भाई बंधु माता बहने कोई पैदल कोई साइकल से कोई ठेला से कोई रिक्शा से अपने अपने मासूम बच्चों को आंचल में छुपा कर भूखे प्यासे कड़ी धूप में सैकड़ों हजारों किलोमीटर लंबी यात्रा कर अपने घर जाने के लिए निकल पड़े। आपकी परेशानी भरी तस्वीरें अखबारों में न्यूज़ चैनलों पर देखकर हर देशवासी का दिल द्रवित हो गया आंखों से आंसू छलक पड़े।पर क्या किया जाए देश और दुनिया पर विपदा आ पड़ी है और हर मानव विवश हो गया है।लोग सड़क पर निकल तो पड़े लेकिन उन्हें यह ज्ञात नहीं हुआ कि हम सब अपने थोड़ी सी परेशानी और कष्ट के बदले कोरोना वायरस संक्रमण को अपने गांव तक ढोकर ले जा रहे हैं। जो भी हो अगर आप देश के अन्य जगहों से चल कर अपने गांव आ रहे हैं तो सर्वप्रथम अपने स्वास्थ्य की जांच करवाएं और फिर 15 दिनों तक अपने आप को प्रशासन द्वारा निर्धारित एकांतवास गृह में निवास कर स्वास्थ्य लाभ लें और अपने देश को कोरोना वायरस संक्रमण से मुक्त करने में अपना अहम भागीदारी सुनिश्चित करें।

गोपेंद्र कुमार गौतम
मीडिया प्रभारी
बिहार राज्य प्राथमिक संघ
गोप गुट औरंगाबाद बिहार
9507341433

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