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केजरीवाल का महानायक का नया अवतार

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक बार फिर नए अवतार की भूमिका में देश विदेश में चर्चा में हैं। उन्होंने चुनावी इतिहास में प्रचंड बहुमत के साथ लगातार तीसरी बार दिल्ली की कमान संभाली है। रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में केजरीवाल ने तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। बताया जाता है बिजली, पानी, महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा जैसी योजनाओं ने आम आदमी पार्टी को दिल्ली में इस बार प्रचंड जीत दिलाई। इस बार पिछली गलतियों से सबक लेते हुए उन्होंने प्रधान मंत्री और केंद्र सरकार से दिल्ली के सर्वांगीण विकास के लिए सहयोग का हाथ आगे बढाकर लोगों का दिल जीत लिया। उन्होंने चुनाव के दौरान भी मोदी पर कोई हमला नहीं बोला। अन्ना आंदोलन की खालिस उपज केजरीवाल अपनी साफगोई के लिए जाने जाते है। उन्होंने अपने मतदाताओं से अपने काम के नाम पर वोट मांगे और साफ कहा यदि उन्होंने काम नहीं किया है तो वोट नहीं दे। उनकी यही बात लोगों ने पसंद की और झोली वोटों से भरदी। शपथ लेते समय इस बार टोपी और मफलर गायब थे। माथे पर बड़ा सा मंगल टीका लोगों को आकर्षित कर रहा था। खुद को दिल्ली का बेटा बताया और अपने पुराने नारे इंकलाब जिंदाबाद , भारत माता की जय और वन्देमातरम का उद्घोष कर आम आदमी का दिल जीतने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। कहा जाता है केजरीवाल ने भाजपा का जय श्रीराम का मिथक तोड़ने में भी सफलता प्राप्त की। उन्होंने भाजपा के इस नारे के मुकाबले बजरंग बली का जयकारा लगाकर अपनी विजय यात्रा प्रशस्त की।
केजरीवाल के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती शाहीन बाग के आंदोलन को समाप्त कराने की है और यदि वे इसमें सफल हो जाते है तो उनकी छवि एक महानायक के रूप में उभरने से कोई नहीं रोक पायेगा। दूसरा काम भ्रष्टाचार से निपटने का है। भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की उपज है केजरीवाल को जड़मूल से खत्म करना उनकी प्राथमिकता है। आज भ्रष्टाचार पूरे देश को निगल रहा है। केजरीवाल दिल्ली में भ्रष्टाचार को समाप्त करने में सफल हो जाते है तो यह उनकी सियासत में बहुत बड़ी जीत मानी जाएगी। उन्हें मुफ्त की राजनीति से भी निजात पाना होगा और जनसेवा के संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा।
भ्रष्टाचार के खिलाफ आम आदमी को सूचना का अधिकार देने के लिए बने कानून में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। अन्ना हजारे के साथ सत्याग्रह करने के बाद नवंबर 2012 में उन्होंने आम आदमी पार्टी की शुरुआत की। साल 2013 में आप ने दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ा और अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस की दिग्गज नेता रहीं शीला दीक्षित को हराकर तहलका मचा दिया। साल 2015 में दिल्ली में विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को रिकॉर्ड 67 सीटें मिलीं। कुल 70 सीटों में से भाजपा केवल तीन ही सीट हासिल कर सकी। इन चुनावों में 15 वर्षों से सत्ता में काबिज कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई। इस दौरान शांतिभूषण, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और कुमार विश्वास सरीखे अनेक साथियों ने उनका छोडा मगर इसके बावजूद उनकी विजय यात्रा पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा और वर्ष 2020 में एक बार फिर 70 में से 62 सीटें जीत कर केजरीवाल जनता के लोकप्रिय महानायक बने।

बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
डी .32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
मो.- 8949519406

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