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किसी भी राष्ट्र का युवा खत्म तो राष्ट्र खत्म !

आज हमारे भारत की युवा ऊर्जा अंगड़ाई ले रही है और भारत विश्व में सर्वाधिक युवा जनसंख्या वाला देश आज बन गया है, इसी युवा शक्ति में भारत की ऊर्जा अंतर्निहित है जोकि हमारे  भारत को महान राष्ट्र और विश्व गुरु बनाने में हमारे युवाओं की ही  महत्वपूर्ण भूमिका होगी।हम सभी स्वामी विवेकानंद जी की याद में प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाते हैं, यह बात तो हम सभी जानते ही हैं कि किसी भी देश को सशक्त राष्ट्र बनाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, युवा खत्म तो देश खत्म इसलिए हम सभी को अपने युवाओं को स्वामी विवेकानंद जी के जीवन और आदर्शों के बारे में बताते हुए जागरूक करने की जरूरत है। साथियों स्वामी विवेकानंद जी हमेशा हर व्यक्ति को सक्रिय जीवन के लाभों के साथ-साथ ही जानवरों, गरीबों और बीमार या किसी प्रकार के वंचित लोगों की देखभाल करने के लिए प्रेरित करते थे, इनका मानना था कि ऐसा करने से कोई भी व्यक्ति भगवान की सेवा कर सकता है। इसके साथ ही स्वामी  विवेकानंद जी चाहते थे कि लोग केवल किताबी ज्ञान तक ही सीमित ना रहे, बल्कि संपूर्ण संसार का ज्ञान ग्रहण करें, ऐसे ही विचारधारा मेरा भी बचपन से हैं। मेरे आत्मीय मित्रों राष्ट्रीय युवा दिवस प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी को मनाए जाने के लिए भारत सरकार द्वारा 1984 में घोषणा किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत के महानतम समाज सुधारक, विचारक और दार्शनिक स्वामी विवेकानंद जी के आदर्शो और विचारों को देशभर के भारतीय युवाओं को प्रोत्साहित किया जाए और जिससे हमारा युवा अपने जीवन में स्वामी विवेकानंद जी के विचारों और आदर्शों को अपने जीवन में शामिल कर सके। आपको बता दें कि स्वामी विवेकानंद जी ने पैदल ही पूरे भारत की यात्रा किए थे, 1893 में शिकागो धर्म संसद में गए और 1896 तक अमेरिका में रहे थे, वैसे तो स्वामी जी को विश्व धर्म परिषद में पर्याप्त समय नहीं दिया गया, वह भी इनको एक प्रोफेसर के पहचान से अल्प समय के लिए शून्य पर बोलने के लिए कहा गया। अपने भाषण के प्रारंभ में ही जब स्वामी विवेकानंद जी ने अमेरिकी भाइयों और बहनों कहा तो सभा के लोगों के बीच करबद्ध ध्वनि से पूरा सदन  गूंज उठा था, इनका भाषण सुनकर विद्वान चकित हो गए थे, यहां तक कि दोस्त वहां के मीडिया ने उन्हें साइक्लोनिक  हिंदू का नाम दिया था। और तो और यह स्वामी जी के भाषण का ही प्रभाव था कि एक विदेशी महिला ने उनसे कहा मैं आपसे शादी करना चाहती हूं। तो विवेकानंद जी ने पूछा कि क्यों देवी जी? मैं तो अखंड ब्रह्मचारी हूं। तब महिला ने जवाब दिया कि मुझे आपके जैसा ही एक पुत्र चाहिए, जो पूरी दुनिया में मेरा नाम रोशन करें और वो केवल आपसे शादी करके ही मिल सकता है मुझे, तब विवेकानंद जी ने कहे की इसका एक और उपाय है, विदेशी महिला पूछी क्या उपाय है? विवेकानंद जी ने मुस्कुराते हुए कहा आप मुझे ही अपना पुत्र मान लीजिए और आप मेरी मां बन जाइए, ऐसे में आपको मेरे जैसा पुत्र भी मिल जाएगा और मुझे अपना ब्रह्मचर्य भी नहीं तोड़ना पड़ेगा। यह सुनकर दोस्त वह विदेशी महिला हतप्रभ होकर विवेकानंद  जी को ताकने लगी। दोस्त आज हमारा युवा जनसंख्या अंगड़ाई ले रही है, किसी भी देश के संपूर्ण विकास के लिए युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई भी राष्ट्र अपनी युवा पूंजी का भविष्य के लिए निवेश किस रूप में करता है? आज हम सभी को यह देखना हैं साथियों की हमारा राष्ट्रीय नेतृत्व देश के युवा बेरोजगारों की भीड़ को एक बोझ मानकर भारत की कमजोरी के रूप में निरूपित करता है या युवाओं को एक कुशल मानव संसाधन के रूप में विकसित करके एक स्वाभिमानी ,सुखी, समृद्ध और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में भागीदारी बनाता है। यह कहीं ना कहीं कुछ हद तक हमारे राजनीतिक नेतृत्व की राष्ट्रीय व सामाजिक सरोकार की समझ पर निर्भर करता है,इसके साथ ही मेरे आत्मीय मित्रों यह हम सभी का भी परम कर्तव्य है कि अपने युवाओं को सत मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करें। यह बात बहुत ही महत्वपूर्ण है कि हमारा युवा पीढ़ी अपनी उर्जा के सपनों को किस तरह सकारात्मक रूप में ढालती है, इसके लिए हमें भी अपने सामर्थ्य अनुसार युवाओं के सपनों को मजबूत बनाने के लिए आगे आकर मदद करने की जरूरत है, मैं खुद पिछले 11 वर्षों से 20-30 मिनट्स अपने 24 घंटे के समय में से भटके हुए युवाओं पर देता आ रहा हूं, अक्सर उन्हें प्रेरित करता रहता हूं कि धूम्रपान नहीं करना है, अल्कोहल नहीं लेना है,बल्कि अपने सपनों पर काम करना है, आज ही  आप भी खुद से वादा कीजिए कि अपने 24 घंटे में से कम से कम 10 मिनट जरूर निकालेंगे अपने देश के युवाओं को सही रास्ता दिखाने के लिए, क्योंकि यह हम सभी जानते हैं कि युवा खत्म तो देश खत्म ! इसीलिए हमें अपने राष्ट्र को बचाने के लिए आज से ही इस युवा शक्ति के सकारात्मक ऊर्जा का संतुलित उपयोग करना होगा,अक्सर हम सभी कहते भी तो है ही कि युवा वायु के समान होता है, जब वायु पुरवाई के रूप में धीरे धीरे चलती है तो सबको अच्छी लगती है, लेकिन जैसे ही सबको बर्बाद कर देने वाली आंधी चलती है तो किसी को भी अच्छी नहीं लगती है। इसलिए हमें इस पुरवाई का उपयोग विज्ञान, तकनीक, शिक्षा, अनुसंधान के क्षेत्र में करना होगा ,मेरे एक बात को याद रखना अगर हम इस युवा शक्ति का सकारात्मक उपयोग करेंगे तो हम विश्व गुरु ही नहीं बल्कि बहुत जल्दी ही विश्व का निर्माण करने वाले विश्वकर्मा के रूप में भी जाने जाएंगे । हम सभी के प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद जी 4 जुलाई 1902 को मात्र 39 साल की अल्प आयु में ही पंचतत्व में विलीन हो गए, लेकिन मेरे आत्मीय मित्रो अपने  पीछे इन्होंने करोंडो युवाओं के सीने में आग जला गए,जो कि इंकलाब और कर्मणयता को निरंतर प्रेरित करती  ही रहेगी, युवाओं को गीता के श्लोक के बदले मैदान में जाकर फुटबॉल खेलने की नसीहत देने वाले स्वामी विवेकानंद जी सर्वकालिक प्रासंगिक रहेंगे।
विक्रम चौरसिया
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