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मातृ कल्याण और भ्रूण के विकास के लिए दृष्टिकोण में क्रांतिकारी बदलाव

आईमम्ज समग्र स्वास्थ्य और कल्याण पर केंद्रित अपनी तरह का पहला प्लेटफॉर्म, जो स्वस्थ गर्भावस्था के लिए एक क्रांतिकारी एवं नया दृष्टिकोण प्रदान करता है
देश भर से 70 स्त्री रोग विशेषज्ञों और अन्य हैल्थकेयर लीडर्स की मौजूदगी में आध्यात्मिक लीडर  बी के सिस्टर शिवानी ने लांच किया ऐप

>> एक वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ, आईआईटीयन और एक जीवन प्रशिक्षक द्वारा संकल्पित, गर्भसंस्कार की वैदिक अवधारणा पर आधारित मंच
>> ऐप का उद्देश्य माता के मानसिक कल्याण के लिए स्थायी प्रभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाना और भ्रूण के विकास पर भावनाओं पर जागरूकता लाना

विजय न्यूज़ ब्यूरो
नई दिल्ली। जैसा कि एक मां अपने गर्भ में एक जीवन का पालन-पोषण करती है, यह सिर्फ उसका शारीरिक स्वास्थ्य नहीं है जो भ्रूण के विकास को प्रभावित करता है बल्कि उसकी मानसिक रूपरेखा और भावनाओं की स्थिति भी बच्चे के मस्तिष्क की वास्तुकला और आईक्यू को बहुत प्रभावित करती है। दुर्भाग्य से, जबकि आधुनिक चिकित्सा मातृ और नवजात मृत्यु दर को कम करने के लिए काम करती है, इसके बावजूद समय के साथ समग्र मातृ स्वास्थ्य और कल्याण पर ध्यान कम हो गया है।

आईमम्ज  दो आईआईटी स्नातकों, ध्यान प्रशिक्षक और वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा तैयार किया गया एक नया प्रयास है, जिसका उद्देश्य समाज में मातृ स्वास्थ्य के दृष्टिकोण में क्रांति लाने का है। यह मंच गर्भ संस्कार के वैदिक दर्शन में संलग्न समग्र भलाई पर ध्यान केंद्रित है जो एक गर्भधारित मां के लिए शारीरिक, भावनात्मक, सामाजिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक कल्याण की आवश्यकता की दृढ़ता से वकालत करता है।

आईमम्स एप्प को आज यहां आध्यात्मिक गुरू ब्रह्माकुमारी सिस्टर शिवानी ने लांच किया। यह लांच गर्भ संस्कार के पैरोकार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत के मातृ स्वास्थ्य के उपायुक्त डॉ. दिनेश बसवाल और यूनाइटेड ग्लोबल हेल्थ के कार्डियक सर्जन, एमडी-सीईओ, डॉ. शिव कुमार अलमेलियारप्पा कार्डियक सर्जन, एमडी-सीईओ, संयुक्त वैश्विक स्वास्थ्य और भारत के माननीय प्रधान मंत्री और नेपाल के स्वास्थ्य सलाहकार की उपस्थिति में किया गया।

इस अवसर पर आईमम्ज के सह संस्थापक एवं सीईओ श्री रवि तेजा आकोण्डी ने अपने उद्बोधन मंे कहा ‘‘ जबकि आधुनिक चिकित्सा मातृ मृत्यु दर को कम करने और शारीरिक रूप से स्वस्थ बच्चों को जन्म देने के लिए एक बहुत अच्छा काम करती है, लेकिन मानसिक रूप से स्वस्थ और जीवन शैली के लिए सही दृष्टिकोण के बारे में हर व्यक्ति को शिक्षित करने के लिए जरूरत से ज्यादा समय की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा दुर्भाग्य से, लगभग 15 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं गर्भावस्था के दौरान जीवन के लिए खतरा बन जाती हैं, जबकि 70 प्रतिशत से अधिक को हल्की से गंभीर एंग्जाइटी का सामना करना पड़ता है। छोटे परिवारों की आधुनिक जीवनशैली और व्यापकता महिलाओं की मनःस्थिति की उम्मीदों को काफी प्रभावित करती है। आईमम्ज का उद्देश्य माताओं की उम्मीद का एक निरंतर साथी बनकर और उन्हें मातृत्व स्वास्थ्य के लिए सही तरीके से कोचिंग देकर इसे बदलना है। डिजिटल प्लेटफॉर्म को देशभर के स्त्री रोग विशेषज्ञों का अपार समर्थन मिला है, जो सक्रिय रूप से अपने रोगियों को इसकी सलाह दे रहे हैं।‘‘

गर्भावस्था एक शारीरिक प्रक्रिया है और मां का दिमाग बच्चे के विकास में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। वास्तव में, मां की भावनाओं की स्थिति बच्चे के आईक्यू पर 51 प्रतिशत तक प्रभाव डाल सकती है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि एक मां के मस्तिष्क द्वारा जारी किए गए न्यूरोपैप्टाइड्स के माध्यम से, बच्चे अपनी भावनाओं को सही ढंग से समझ सकते हैं और यह बच्चे के मस्तिष्क आर्किटेक्चर को गहराई से प्रभावित करता है। गतिविधि-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्देश्य इस जागरूकता को माताओं की आशाओं के एक व्यापक हिस्से तक ले जाना और उन्हें मानसिक रूप से स्वस्थ जीवन शैली अपनाने में मदद करना है।

इस अवसर पर आईमम्ज के सह संस्थापक एवं आईएसएआर, आईएसपीएटी एवं एसएफओएमएस के प्रेसिडेन्ट डाॅ.जयदीप मल्होत्रा ने कहा ‘‘ जबकि हम माताओं की अपेक्षा के लिए शारीरिक कल्याण के महत्व को समझते हैं, मानसिक कल्याण के महत्व को अक्सर अपर्याप्त रूप से समझा जाता है। आईमम्ज का उद्देश्य माताओं के बीच इस जागरूकता को फैलाना है और उन्हें सही मानसिक दृष्टिकोण अपनाने की दिशा में मार्गदर्शन करना है ताकि बच्चे को विकास के लिए आवश्यक वातावरण प्रदान किया जा सके। जिन गतिविधियों में हम माताओं को शामिल करते हैं उनमें माइंडफुलनेस, रचनात्मक खोज, आराम संगीत और योग के साथ-साथ अन्य शामिल हैं। वैज्ञानिक शोधों ने साबित किया है कि ये गतिविधियां मां के मस्तिष्क और भावनाओं के माध्यम से शिशु के स्वस्थ मानसिक विकास के लिए रास्ता बनाती हैं।‘‘

गर्भ संस्कार की प्राचीन अवधारणा इस क्रांतिकारी नए दृष्टिकोण की जड़ में है। एक मां जो सोचती है, बोलती है और अनुभव करती है उसका शिशु के मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ता है। गर्भावस्था के दौरान जीने का सकारात्मक और मानसिक रूप से स्वस्थ तरीका अपनाने से, हम स्वस्थ और होशियार शिशुओं का निर्माण करने में मदद कर सकते हैं।

आईमम्ज ऐप महिलाओं को माइंडफुलनेस और मानसिक व्यायाम का अभ्यास करने के लिए गतिविधियों की एक श्रृंखला जोड़े रखता है जो उन्हें चिंता को नियंत्रित करने, सकारात्मक भावनाओं का अनुभव करने और हर रोज अपने दिमाग को उत्तेजित करने में मदद करता है। इसमें मस्तिष्क को बढ़ावा देने वाले व्यायाम शामिल हैं जो बच्चे के मानसिक विकास को प्रोत्साहित करते हैं, आराम करने और चिंता या एंग्जाइटी को नियंत्रित करने के लिए संगीत चिकित्सा, और बच्चे की जागरूकता और बुद्धि को बेहतर (आईक्यू) बनाने वाली रचनात्मक गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं।

उन गर्भवती माताओं, जिन्होंने ऐप का उपयोग करना शुरू कर दिया है, पहले से ही इसके प्रभाव की शक्तिशाली प्रभाव की जानकारी भेज रही हैं। एक कामकाजी महिला जो एक तनावपूर्ण चरण का अनुभव कर रही थी, लगभग 3 दिनों के लिए अपने बच्चे को ‘‘किक‘‘ का अनुभव करने में विफल रही। हालांकि, जैसे ही उसने ऐप में प्लग इन किया और रागकल्याणी का एक सेशन सुना, उसके गर्भ में पल रहे शिशु ने इसका सक्रियता से रेसपाॅन्स देना शुरू कर दिया। यहां यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि तेज दिमाग वाली माताओं के बच्चे कम रोते हैं, अधिक सोते हैं और बेहतर सीखते हैं। इसी समय, भ्रूण के विकास का भविष्य के वयस्क रोगों के लिए जोखिम पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

इस अभिनव प्रयास का उद्देश्य मातृत्व स्वास्थ्य के दृष्टिकोण में प्रतिमान बदलाव लाना है। माताओं के लिए एक जीवन प्रशिक्षक के रूप में कार्य करने के अलावा, डिजिटल प्लेटफॉर्म भी क्लीनिक और अस्पतालों के समाधान और उपकरणों को विकसित करने का इरादा रखता है ताकि महिलाओं की आशा एव ंअपेक्षाओं को पूरा किया जा सके।

इस लांच के अवसर पर उपस्थित अन्य गणमान्य लोगांें में आईमम्ज के सह संस्थापक एवं सीअीओ मयूर धू्रपटे, एफओजीएसआई, आईएसएआर एवं आईएसपीएटी के पूर्व अध्यक्ष डाॅ.नरेन्द्र मल्होत्रा, ग्लोबल रेनबो आईवीएफ के सीनियर कन्सलटेंट डाॅ. निहारिका मल्होत्रा, इयूम्यूज के सह संस्थापक, वैज्ञानिक एवं संगीतकार मैरिना मोजेज एवं वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डाॅ. अनिता सभरवाल भी उपस्थित रहे।

 

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