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विश्व स्वास्थ्य दिवस पर स्वस्थ लाइफस्टाइल अपनाने के लिए जागरूकता शुरू की

मेरठ। भारत के युवाओं में पारिवारिक पृष्ठभूमि के अलावा खराब लाइफस्टाइल अपनाने से भी सबसे ज्यादा स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होती हैं। बदलते लाइफस्टाइल और कमजोर सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि के कारण बहुत सारे मरीजों में कई तरह की बीमारियां तेजी से बढ़ी हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए हर किसी को अनुकूल और बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करने के लिए मैक्स हॉस्पिटल पटपड़गंज, नई दिल्ली ने विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर स्वस्थ लाइफस्टाइल अपनाने को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान शुरू किया है।
भारत विश्व में सबसे बड़ी आबादी वाला दूसरा देश है और यहां के विभिन्न भौगोलिक और सामाजिक आर्थिक परिदृश्यों के कारण एक तिहाई आबादी को भी बेहतर स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस लिहाज से लोगों को स्वस्थ लाइफस्टाइल अपनाने के लिए प्रेरित करना और चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में हुई हाल की तरक्कियों के बारे में बताना बहुत जरूरी हो गया है। स्वस्थ रहने के लिए नियमित रूप से व्यायाम और पौष्टिक आहार के अलावा नियमित जांच और डायग्नोसिस की भी अहम भूमिका होती है। मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज में इंटरनल मेडिसिन विभाग की निदेशक डॉ. मीनाक्षी जैन ने कहा, ‘निष्क्रिय लाइफस्टाइल के लिए कोविड—19 को जिम्मेदार ठहराया जाता है जबकि इस महामारी ने हमें अच्छी सेहत बनाने रखने का महत्व भी बता दिया है। मोटापा, डायबिटीज, हाइपरटेंशन और हाई लिपिड लेवल जैसी लाइफस्टाइल संबंधी बीमारियां कई रोगों का मुख्य कारण होती हैं जिनमें कार्डियक रोग, न्यूरो वैस्कुलर रोग, किडनी खराब होना आदि शामिल हैं। लाइफस्टाइल में नियमित व्यायाम, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण, धूम्रपान का त्याग आदि जैसे बदलाव से सेहत खराब होने का खतरा बहुत हद तक कम हो सकता है।’

सादगीपूर्ण लाइफस्टाइल और खानपान में बदलाव से मरीजों में टी2डीएम (टाइप टू डायबिटीज मेलिटस) नियंत्रण और स्थिति में सुधार आ सकता है। इस जानलेवा बीमारी से जूझ रहे लाखों लोग यदि अपने भोजन से मांसाहार का त्याग कर दें तो उनका ब्लड प्रेशर सुधर सकता है। स्टार्च रहित सब्जियां, फल, बीन, बीज और बादाम जैसे शाकाहार खानपान में शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता सुधारते हुए डायबिटीज ठीक करने तक की क्षमता है। शाकाहार न सिर्फ ब्लड प्रोटीन (एचबीए1सी) का स्तर कम कर सकता है बल्कि ब्लड शुगर लेवल, शरीर का वजन और कोलेस्ट्रॉल भी सुधर सकता है। डॉ. मीनाक्षी बताती हैं, ‘मोटापा हर उम्र के लोगों की सामाजिक और मनोवैज्ञानिक जिंदगी को कठिन बना देता है। व्यायामरहित लाइफस्टाइल, अस्वास्थ्यकर खानपान और किसी अंग के अनियंत्रित आकार के कारण ही 1980 के दशक के बाद से मोटापे का मामला तीन गुना बढ़ चुका है। मोटापे के कारण टाइप टू डायबिटीज मेलिटस, सीबीटी , हाइपरटेंशन और स्ट्रोक, नि:संतानता और कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। एक अनुमान है कि विश्व में एक अरब से ज्यादा लोग अधिक वजन के हैं और कम से 30 करोड़ लोग क्लिनिक मोटापे के शिकार हैं।’

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