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तम्बाकू उत्पादों के सेवन पर कानूनी लगाम

देश में हर वर्ष तंबाकू उत्पादों के सेवन से होने वाली विभिन्न बीमारियों की वजह से करीब 10 लाख लोगों की अकाल मौतों और तम्बाकू के दुष्परिणामों को देखते हुए सरकार इस पर कानूनी लगाम कसने जा रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की एक समिति ने बीड़ी-सिगरेट और तंबाकू उत्पादों के सेवन की कानूनी उम्र को 18 वर्ष से बढ़ा कर 21 वर्ष करने की सरकार को अनुसंशा की है। सरकार इस रिपोर्ट का गहनता से अध्य्यन कर रही है और जल्दी ही इसे लागू करेगी। इस रिपोर्ट की सिफारिशों के अनुसार सिगरेट एंड अदर टोबैको प्रोडक्ट एक्ट में बदलाव किया जाएगा। एक्ट में बदलाव के बाद देश में 21 साल से कम आयु के किशोर तम्बाकू के सेवन और खरीद फरोख्त नहीं कर पाएंगे। साथ ही माता-पिता या घर के बड़े भी 21 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को तंबाकू उत्पाद लाने के लिए बाजार भी नहीं भेज सकेंगे, इसे भी अपराध माना जाएगा। सरकार का मानना है कि 21 वर्ष तक की उम्र तक तंबाकू उत्पादन के सेवन से रोक लिया गया तो देश में तंबाकू उत्पादों के सेवन करने वालों की संख्या में जबरदस्त कमी आएगी। इस कानून के उल्लंघन पर जुर्माने में भी वृद्धि की जाएगी। ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे-2 के अनुसार देश में 29 फीसदी लोग किसी न किसी तरह के तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं।
तम्बाकू के बारे में बताया जाता है कि यह निकोटियाना प्रजाति के पेड़ के पत्तों को सुखा कर नशा करने के लिए बनाई जाती है। तम्बाकू एक मीठा जहर है जो बीड़ी सिगरेट, हुक्का, गुल, गुड़ाकु, जर्दा, किमाम, खैनी, गुटखा अदि धुंवा रहित और धूम्रपानयुक्त कई रूपों में बाजार में उपलब्ध है। तम्बाकू के इस्तेमाल से मुँह, गला, मस्तिष्क, घेंघा, फेफड़ें, पित्ताशय, गुर्दे और स्तन सहित शरीर के विभिन्न अंगों में कैंसर पैदा हो सकता है। तम्बाकू के कारण हदय रोग, फेफड़े संबंधी रोग, पक्षाघात, अंधापन, दांत और मसूड़े की बीमारियां भी हो सकती है। तम्बाकू के गुटके के रूप में खाने से सफेद दाग, मुँह का नहीं खुल पाना तथा कैंसर रोग भी हो सकता है। लगातार गुटखे या तम्बाकू का सेवन आपके दांत को ढीले और कमजोर बना देते हैं बैक्टीरिया दांतों में जगह बना लेते हैं जिससे दांतों का रंग बदलने लगता है और धीरे-धीरे दांत गलने भी लगते हैं। तम्बाकू या गुटखा लगातार खाने वालों की जीभ, जबड़ों और गालों के अंदर सेंसेटिव सफेद पेच बनने लगते हैं और उसी से मुंह में कैंसर की शुरुआत होती है जिसके बाद धीरे-धीरे मुंह का खुलना बंद हो जाता है और मुंह में कैंसर फैल जाता है।
भारत दुनिया में तम्बाकू का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता और तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। तम्बाकू के इस्तेमाल की व्यापकता पुरुषों में 42 प्रतिशत और महिलाओं में 14 प्रतिशत है। आँकडें बताते हैं भारतीय जनसंख्या का 30 प्रतिशत से अधिक वर्ग जो 15 वर्ष से उपर हैं, किसी न किसी रूप में तम्बाकू का सेवन करता है। उसमें से 14.6 प्रतिशत बच्चे वो है जो 13-15 वर्ष के बीच आते हैं।
यह सर्वविदित है तम्बाकू के सेवन से जीवन शक्ति का भी ह्रास होता है। व्यक्ति को पता चल जाता है कि तम्बाकू का सेवन हानिकारक है किंतु लाख प्रयासों के बाद भी यह लत छूटती नहीं। और जब व्यक्ति किसी भयानक रोग का शिकार हो जाता है तब उसे इसके खतरनाक होने का एहसास होता है मगर तब तक देर हो चुकी होती है। यह सत्य है कि तम्बाकू का प्रयोग किसी भी रूप में किया जाए, इसका शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ता ही है। तम्बाकू सेवन केवल शरीर के लिए ही हानिकारक नहीं है, यह व्यक्ति की सामाजिक-आर्थिक सिथति को भी कमजोर बनाती है। कई बार इसकी वजह से लोगों का घर-परिवार ही तबाह हो जाता है।
भारत में किए गए अनुसन्धानों से पता चला है कि गालों में होने वाले कैंसर का प्रधान कारण खैनी अथवा जीभ के नीचे रखनी जाने वाली, चबाने वाली तंबाकू है। इसी प्रकार ऊपरी भाग में, जीभ में और पीठ में होने वाला कैंसर बीड़ी पीने के कारण होता है। सिगरेट गले के निचले भाग में कैंसर करती है और आंतड़ियों के कैंसर की भी संभावना पैदा कर देती है। यदि हमें एक स्वस्थ एवं खुशहाल जिन्दगी हासिल करनी है तो हमें तम्बाकू का प्रयोग हर हालत में छोड़ना ही होगा। ऐसा करना कोई मुश्किल काम नहीं है। तंबाकू का प्रयोग दृढ़ निश्चय करके ही छोड़ा जा सकता है।

बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
डी-32, माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
मो.- 9414441218

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