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तुला राशि : वर्ष 2020 का वार्षिक राशिफल

स्वास्थ्य: यह वर्ष स्वास्थ्य की दृष्टि से मध्यम रहेगा। वर्ष पर्यन्त ऋतुजन्य रोगों से समस्या होगी। स्त्री वर्ग को माहवारी, कमर, कटीशूल, बाल झड़ना, सिरदर्द, स्मरण शक्ति आदि से सम्बधित समस्यायें रह सकती हैं। स्त्रियों को मानसिक विकार भी होंगे। चर्म विकार, दमा, नेत्रज्योति, न्यूनता, खाँसी, मूत्र-विकार आदि से भी सतर्क रहें। मनोबल की न्यूनता भी स्वाभाविक है। यदि आप वृक्क (किडनी) के रोगी हैं, तो अधिक ध्यान दें एवं नियमित चिकित्सीय सहयता लेते रहें। वर्ष के उतरार्ध में आपको मोटापे की समस्या हो सकती है।

आर्थिक स्थिति: इस वर्ष आपकी आर्थिक स्थिति दुर्बल रह सकती है। झूठे न्यायिक विवाद में फंसकर धन का अपव्यय हो सकता है। अत्यधिक परिश्रम करने पर भी आर्थिक स्थिति में कम ही सुधार होगा। 19 सितम्बर से राहु महाराज आपकी राशि से अष्टम स्थान पर एवं केतु महाराज द्रितीय स्थान में रहने से धन का अपव्यय हो सकता है। अनैतिक मार्ग की ओर रुझान बढ़ सकता है। परिवारजनों की आवश्यकता पूर्ती हेतु धन व्यय भी होगा। गलत संगति के कारण धन नष्ट हो सकता है, निम्नव्यक्ति की संगति से दूर ही रहें।

व्यवसाय: इस वर्ष के प्रारम्भ में आपको छोटी-मोटी समस्या हो सकती है। 13 फरवरी से 14 मार्च तक शेयर-सट्टा में निवेश न करें। साझेदार से मतभेद न करें, अवांच्छित वार्तालाप से साझेदारी को सुरक्षित रखें। 30 मार्च से 30 जून के मध्य व्यवसाय के अनेक मार्ग खुलेंगे, आप घर बैठे ही अपने व्यापर व व्यवसाय का विस्तार कर पायेंगे। नौकरीपेशा से जुड़े जातकों पर कार्यभार अधिक रहेगा। अपने सहयोगियों एवं अपने अधीनस्थों से सहायता प्राप्त होगी।

कौटुम्बिक एवं सामाजिक: यदि आप अपने परिवार से सहयोग की अपेक्षा करते हैं, तो पहले आपको भी परिवार का सहयोग करना होगा। किसी भी कार्य में अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य के सुझाव को ध्यान में रखते हुये निर्णय लें तथा अपनी माता का आशिर्वाद प्राप्त करने के उपरान्त ही आगे बढ़ें। पारिवारिक मतभेद बने रहेंगे। विवाह, मांगलिक उत्सव, यज्ञ-हवन, पूजा-पाठ आदि में व्यस्त रहेंगे। सामाजिक प्रतिष्ठा एवं वर्चस्व में वृद्धि होगी। वर्ष के उतरार्ध में कुछ परिवारजनों से मनमुटाव होने के कारण अशान्ति हो सकती है।

प्रणय जीवन: इस वर्ष यदि आप सुखी दाम्पत्यजीवन व्यतीत करना चाहते हैं, तो वर्ष पर्यन्त किसी के बहकावे में न आयें तथा स्वयं द्वारा सुनी व देखी बातों पर ही विश्वास करें। जो जातक अपने प्रेम-सम्बन्ध को वैवाहिक सम्बन्ध में परिवर्तित करना चाहते हैं, उनको यह परामर्श है की किसी प्रभावशाली व्यक्ति की ही सहयता लें, अन्यथा सफलता प्राप्ति नहीं होगी। प्रियतमा से मेल-मिलाप में सावधानी रखें। विचारो के आदान-प्रदान में सोशियल मिडिया का उपयोग कम ही करें।

स्त्री जातक फल: इस वर्ष विवाहित स्त्रियों की जीवनसाथी से अनबन हो सकती है। परिवारजनों से शारीरिक एवं मानसिक कष्ट प्राप्त होगा। मुत्यु तुल्य कष्ट का सामना भी करना पड़ सकता है, स्वयं की रक्षा हेतु जागृत रहें। अनैतिक मार्ग की ओर न बढ़ें। व्यर्थ के वाद-विवाद भी सम्भव हैं। पति से मनमुटाव एवं विरोध बढ़ सकता है। उनके क्रिया-कलापों की उपेक्षा कर पाना आपके लिये सरल नही होगा। विवेकपूर्ण निर्णय करें तथा वृद्धजनों का हस्तक्षेप रखें, अन्यथा अलगाव सम्भव है।

राजकीय स्थिति: वर्ष के प्रारम्भ से ही अपनी राजकीय कार्यक्षेत्र की ओर सचेत रहें। यदि आपके जन्म के ग्रह आपको बल दे रहे हैं, तो इस वर्ष आपकी राजकीय प्रगति सुनिश्चित है। 19 सितम्बर से आपकी मानसिक विचारधारा विपरीत हो सकती है। यदि आपको चुनावी सफलता की लालसा है तथा आप चुनाव में अपना वर्चस्व बनाये रखना चाहते हैं, तो सर्वप्रथम समाज व अपने निकटवर्ती व्यक्तियों के समक्ष अपनी अनुकूल छवि बनायें।

विद्यार्थी जीवन: वर्ष के प्रारम्भ में विधार्थीओं को मनोवांच्छित फल प्राप्त हो सकता है। परिश्रम का पूर्ण लाभ मिल सकता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में परिणाम अनुकूल रहेगा। प्रतियोगिता में सफलता प्राप्त होगी। साक्षात्कार तथा प्रतियोगिता में सफलता की सम्भावना में वृद्धि होगी। 14 मई से 14 जून के मध्य आने वाली परीक्षाओं में अपने मित्र पर विश्वास न करें तथा उनके बताये हुये उत्तर को सही न मान लें। शिक्षा में अरुचि होने के कारण उच्च परिणाम प्राप्त नहीं हो पायेगा।

सारांश:
इस वर्ष आपका शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य मिश्रित रहेगा। पारिवारिक दृष्टि से माता के साथ एवं भाई-बहन के साथ सम्बन्धों में कुछ मतभेद हो सकते हैं। नौकरीपेशा जातक अपनी उन्नति हेतु सामान्य प्रयास ही करें, अधिक उत्सुकता का प्रदर्शन न करें। व्यापारी एवं ठेकेदार वर्ग के जातक सन्तोष रखें। कच्चे या पक्के माल का संग्रह अपने निवेश को ध्यान में रखते हुये ही करें। अपनी सन्तानों की शिक्षा की ओर ध्यान दें तथा उनके लिये समय निकालें। यदि आप बीपीएससी अथवा यूपीएससी जैसी महत्वपूर्ण स्पर्धात्मक परीक्षाओं अथवा किसी केन्द्रीय परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो पूर्व से ही उपयुक्त दिशा में परिश्रम करना आरम्भ कर दें। दाम्पत्यजीवन या प्रणयजीवन दोनों में से इस वर्ष किसी एक को चुनना अनिवार्य हो जायेगा। वर्ष के प्रारम्भ में वाहन चलाते समय पूर्ण सावधानी रखें। यदि कोई नया कार्य आरम्भ करना चाहते हैं, तो 24 जनवरी से पूर्व ही आरम्भ करें।

मर्यादा: –

  1. वर्ष 2020 के आरम्भ में कोई दशा नहीं है। 24 जनवरी से आप पर चतुर्थ ढैया (लघु कल्याणी) लोहे के पद से प्रारम्भ होगी, जो पारिवारिक चिन्ता एवं अप्रत्याशित समस्या उत्पन्न कर सकती है।
  2. आप परिजनों के हितेक्षु एवं उपकारी हैं। यदि विशेष ध्यान रखेंगे तो बन्धुओं से वाद-विवाद नहीं होंगे।
  3. आप आशावादी, व्यवहारकुशल, हँसमुख एवं कलाप्रेमी हैं, परन्तु कामुकता पर नियन्त्रण रखें।
  4. आप धैर्यवान एवं सहनशील नही होने के कारण शीघ्र ही क्रोधावेश में आ जाते हैं, किन्तु कुछ समय पश्चात ही आपका क्रोध शान्त भी हो जाता है।
  5. आप भौतिक संसाधनों, वस्त्र, आभुषण इत्यादि के माध्यम से अपनी समृध्धि का प्रदर्शन करते हैं। वास्तव में यह प्रदर्शन कभी-कभी आपके लिये समस्या भी उत्पन्न कर सकता है।
  6. आप अपने हित साधन में नैतिक-अनैतिक, उचित-अनुचित किसी भी उपाय का प्रयोग करने से नही बचते, इस वर्ष यह आदत आपके लिये हानिकारक सिद्ध हो सकती है।
  7. सामन्यतः आप लक्ष्य निर्धारण के उपरान्त नवीन योजनायें तो बनाते हैं, किन्तु जैसे ही परिस्थिति परिवर्तित होती है, आपकी योजना मात्र एक रुपरेखा अथवा स्वप्न बन कर रह जाती है।
  8. वर्ष 2020 में प्रत्येक क्षेत्र में उतना ही आगे बढ़ें, जितना उस क्षेत्र के लिये आप बलशाली है।

समाधान: –

  • शनिवार का व्रत करें तथा सन्ध्याकाल में भोजन करें।
  • किसी शनिवार के दिन काला वस्त्र, काली उड़द, काला तिल, तेल, लोहे का पात्र, छाता, चमड़े के काले जूते, काले उनी कम्बल, दक्षिणा के साथ किसी वृद्ध व दिव्यांग भिक्षुक को या श्मशान में काम करने वाले डोम राजा अथवा चाण्डाल को दान में दें।
  • श्री हनुमान चालीसा या सुन्दरकाण्ड का पाठ करें।
  • आचार-विचार एवं आहार-विहार शान्त व शुद्ध रखें।
  • श्री महामृत्युञ्जय मन्त्र के जाप के साथ होमाहुति भी दे सकते हैं।
  • मदिरा एवं परस्त्रीगमन से दूर रहें, किसी भी प्रकार का व्यसन न करें।
  • पद एवं आयु में बढ़े व्यक्तियों का सम्मान करें। भिक्षुकों को भोजन करायें।

-निम्नलिखित मन्त्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करें-
ह्रीं नीलाञ्जनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

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