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पुरुषों की समस्याओं पर सुन ही लीजिए

19 नवंबर अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस विशेष

देश और दुनिया में प्रतिदिन कोई न कोई दिवस विशेष मनाया जाता है। कई बार तो ऐसी स्थिति होती है कि एक ही दिन में 4/5 तरह के कई विशेष दिवस मनाए जाते हैं। कभी महिला दिवस तो कभी बेटी दिवस। कभी सफाई दिवस तो कभी प्रदूषण मुक्ति दिवस। कभी पिता दिवस तो कभी माता दिवस। इन सभी दिवसों के मनाने के पीछे उद्देश्य है कि उस दिन विशेष पर उसके बारे में अपनी संवेदनशीलता प्रकट करें, उनमें एक विश्वास प्रकट करें। महिला दिवस पर अक्सर मजाक में कहा जाता है कि अरे भाई पुरुष दिवस कब मनाया जा रहा है! बेचारे पुरुष! लेकिन पुरुष भी इस मामले में अब बेचारे नहीं रहे हैं। प्रति वर्ष 19 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया जाता है। महिला दिवस पर महिलाओं के अधिकार और उनके कर्तव्यों पर चर्चा की जाती है। उनके लिए संवेदनशीलता प्रदर्शित की जाती है। पुरुष उन्हें गिफ्ट देकर उनका और ज्यादा सम्मान करते हैं। तो महिलाएं प्लीज पीछे न रहें! पुरुष दिवस के रूप में एक मौका आपके सामने है। पुरुषों को कोई न कोई गिफ्ट देकर उनके प्रति आस्था प्रकट करें। उनके अधिकारों की रक्षा करें। उनके प्रति संवेदनशीलता व्यक्त करें। उन्हें सम्मान दें। आखिर है तो बेचारे पुरुष!

त्रिनिडाड टोबेगो के डॉ.जीरोम तिलकसिंह के प्रयासों की बदौलत यूनेस्को ने वर्ष 1989 से 19 नवंबर का दिन अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस के रूप में घोषित किया गया। वर्ष 2007 में पहली बार भारत में अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस का आयोजन किया गया। पुरुष अधिकार संस्था सेव इंडियन फैमिली ने भारत में इसकी शुरुआत की। इससे पूर्व अमेरिका की मिसौरी यूनिवर्सिटी के प्रो. थॉमस की कोशिशों के बाद सर्व प्रथम 7 फरवरी 1992 को कुछ देशों में अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया गया। वर्ष 1995 आते-आते उन देशों में भी बेचारा पुरुष दिवस औंधे मुँह गिर पड़ा। पर अब यह दिवस दुनिया के 70 से ज्यादा देशों में खुलकर मनाया जाता है। इस दिन खासतौर पर पुरुषों को होने वाली परेशानियों पर खुलकर चर्चा भी की जाती है। पुरुष दिवस का उद्देश्य पुरुषों और बच्चों के स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और आदर्श पुरुषों के बारे में दुनिया को बताना होता है। इस दिन पुरुषों की उपलब्धियों का उत्सव मनाया जाता है। समाज,परिवार व देश-दुनिया में पुरुषों के सहयोग पर भी बात होती है। कई बार परिवार और काम की जिम्मेदारी निभाते-निभाते पुरुषों को कड़ी मेहनत करने के बावजूद घर-परिवार और समाज में उचित सम्मान नहीं दिया जाता है। उन्हें उपहास की दृष्टि से देखा जाता है। अपने आत्मसम्मान को ठेस पहुँचने की वजह से कई पुरुष आत्महत्या कर चुके हैं। समाज में पुरुषों के योगदान की स्पष्ट स्वीकारोक्ति नहीं मानी जाती। उन्हें होने वाली परेशानियों का भी समाधान हो, साथ ही साथ उनके आत्मसम्मान को ठेस न पहुंचे। तब डॉ.जीरोम ने वैश्विक आंकड़े देकर पुरुषों के हक में आवाज उठाई। उन्होंने दोबारा पुरुष दिवस मनाए जाने के प्रयास किए व सफल हुए।

सच है कि नारी के बिना जीवन अधूरा है। लेकिन यह भी सच है कि पुरुष के बिना भी जीवन अधूरा ही रहेगा। पुरुष न सिर्फ किसी नन्हीं जान को संसार में लाने का भागीदार होता है, बल्कि पूरी जिंदगी पिता के तौर पर अपनी संतान के लिए दुनिया की सारी खुशियाँ हासिल करता है। वह एक मित्र, भाई, पिता और दादा जैसे अहम किरदार निभाकर पूरे परिवार को जीवंत बनाता है। घर और बाहर कोल्हू के बैल की तरह परिवार की खुशहाली के लिए चक्कर काटता फिरता बेचारा जीव! भारत में अब महिला और बाल विकास मंत्रालय की तरह ही पुरुष विकास मंत्रालय बनाए जाने की माँग उठाई जा चुकी है। ऑल इंडिया मेन्स वेलफेयर एसोसिएशन ने कुछ साल पहले राष्ट्रीय पुरुष आयोग बनाने की मांग भी की थी। लेकिन घबराइये मत! इस पर अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं को तोहफे दिए जाते हैं। इस दिन ढेर सारी शुभकामनाएं दी जाती हैं। सरकार बसों, ट्रेनों में मुफ्त यात्रा की सौगातें देती है। लेकिन बेचारे पुरुष! अतंरराष्ट्रीय पुरुष दिवस को लेकर भी आधिकारिक वेबसाइट ही जारी कर दें। कुछ नहीं तो फेसबुक वाट्सअप पर ही शुभकामनाओं का कोई पेज बना डालें। पुरुषों की भी अपनी ऐसी समस्याएं हैं, जिनसे उन्हें जूझना पड़ता है। लगभग 85 फीसदी पुरुष बेघर हैं व 70 फीसदी पुरुषों की हत्याएं हुई हैं।करीब 76 फीसदी पुरुष आत्महत्याएं करते हैं। सामाजिक जीवन में घरेलू हिंसा शिकार में भी 40 फीसदी पुरुषों का आंकड़ा भी पाया गया है। जेंडर असमानता के शिकार भी बने हैं बेचारे पुरुष! पुरुषों को न तो ठीक से रोने का अधिकार है न सजने-सँवरने का! हर कोई जानता है कि 8 मार्च को महिला दिवस मनाया जाता है, लेकिन कोई नहीं जानता कि 19 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया जाता है। मैं खुद भी गूगलदास की कृपा से यह जान पाया हूँ।

यह दिन पुरुषों को भेदभाव, शोषण, उत्पीड़न, हिंसा और असमानता से बचाने और उन्हें उनके अधिकार दिलाने के लिए मनाया जाता है। देखने-सुनने में यह अजीब लग रहा होगा। लेकिन महिलाओं की तरह पुरुष भी असमानता का शिकार होते हैं। नारी सशक्तिकरण के लिए कई कार्यक्रम चलाए जाते हैं ताकि उन्हें पुरुषों के बराबर का दर्जा दिया जा सके। महिलाओं की तरह पुरुषों की समस्याओं पर भी ध्यान देना जरूरी है। जेंडर समता का अर्थ केवल महिलाओं के अधिकार ही नहीं है पुरुष व महिला विरोधी नहीं पूरक है जीवन के। …और सुनिए हुजूर! 19 नवम्बर को ही दुनिया भर में विश्व शौचालय दिवस भी मनाया जाता है। विश्व में अभी भी 892 मिलियन लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं। विश्व शौचालय दिवस का उद्देश्य लोगों को शौचालय के उपयोग के लिए जागरुक करना है। विश्व पुरुष दिवस के साथ ही मनाइए विश्व शौचालय दिवस! यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों का एक हिस्सा है। आइए इन दिवसों को समझें। मनाएँ। आदर करें।

रामविलास जांगिड़, 18, उत्तम नगर, घूघरा, अजमेर (305023) राजस्थान

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