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एमए इन उपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन

पिछले कुछ सालों से मेरे लिए कोई काम नहीं है। अब मेरा एक ही काम है अपने परिचितों से आँखें चुराना। देखते ही कन्नी काट कर इधर-उधर छुप जाना। कारण सिर्फ इतना था कि मैंने किसी विश्वविद्यालय से एमए प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण कर लिया था; जो अब मेरे लिए कोई उपयोग की चीज नहीं रही। छिपकर जाने और प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होने की परेशानी में मैंने अपना चेहरा लटका लिया था। इस दौरान मैंने पूरी मूर्खता प्राप्त कर ली थी। मैंने सड़क से भी आना जाना छोड़ दिया और छिप-छिपकर इधर-उधर ही गलियों में गलियों से ही गलियों के द्वारा ही कन्नी काटके भागता फिरता रहता। जिस किसी भी परिचित व्यक्ति को देखता तो उससे नजरें बचा लेता। प्रथम श्रेणी से एमए करने के बाद अब इसके सिवाय अब और करता भी क्या? आंखें मींच कर सड़क पार कर जाता। घर में खाने को जो भी मिल जाता उसमें बिना मीन-मेक निकाले चुपचाप से खा लेता। मुझे यह महसूस हुआ कि शिक्षा की हर एक डिग्री के साथ अपनी जिंदगी को यूँ ही लुटाते चले जा रहा हूँ। अब मेरे पास भटकने के अलावा कोई काम नहीं रह गया था।
इस बीच मुझे एक भिखारी मिला। वह किसी कुत्ते के द्वारा चुराई रोटी को छीनकर खा रहा था। वह मुझे राजा लगा। वह एक शानदार आदमी था उसमें आशा, साहस और दर्शन कूटकूट कर भरा हुआ था। वह बहुत ज्यादा पढ़ा लिखा न था। इसीलिए वह बहुत सुसंस्कृत व कुशाग्र बुद्धि का था। भीख मांगने में वह बहुत बड़ा एक्सपर्ट था। उसने कई तरह से भीख मांगने का अपना शास्त्र विकसित किया। हिंदुओं के मोहल्ले में अलग तो मुसलमानों के मोहल्ले में अलग! वह बहुत अद्भुत किस्म का आदमी लगता था। अपनी दयालुता उदारता के कारण मेरी कृपा का पात्र बना। वह मेरे लिए सबसे सही आदमी था। वह एक पत्थर पर बैठकर अपने भीख व्यवसाय को शुरू करता। वह पत्थर मुझे किसी सिंहासन से भी ज्यादा अच्छा लगता। उसका टूटा हुआ छाता मुझे किसी राज सिंहासन की शाही छतरी जैसा दिखाई देता। अस्थिचर्म का ढांचा। अवशेष रबड़ी दाढ़ी। बढ़े हुए बेतरतीब बाल। फटे हाल जैसे हो कोई सरकारी नैतिकता। पुराने चिथड़े में लिपटा बदन। मुंह सुखा हुआ। थूक का गोदाम। गाल पिचके। आंखे गड्ढों में धंसी जैसे कोई ईमानदारी हो। उसकी ऐसी रूपरेखा मुझे किसी राजाशाही से भी अधिक सुंदर लग रही थी। वह भिखारी दुनिया का सबसे बड़ा महान व्यक्ति है। मैं जिस तरीके से पढ़ लिख कर प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुआ; बहुत हीन महसूस कर रहा हूँ इस भिखारी से। काश! एमए पास मुझमें इस शिक्षा से उपेक्षित व्यवहारगत परिवर्तन ही आया!

(रामविलास जांगिड़)

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