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महावारी के समय मैदान छोड़ भागे निजी चिकित्सक

लखनऊ एक तरफ केंद्र की मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार कोरोना से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर अभियान चलाए हुए हैं वही दूसरी ओर ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो मोदी योगी के अभियान को पलीता लगाने में लगे हालात यह है कि जिनके कंधों पर करो ना कोरोमा करो ना से निपटने की जिम्मेदारी वहीद वही लोग हथियार डाल चुके हैं इसकी बान की लखनऊ में प्राइवेट चिकित्सा देने वाले डॉक्टर से बड़ी कोई और मिसाल नहीं हो सकता है करो ना करो ना का डर इन डॉक्टरों में इतना बैठा है। इन्होंने अपने न क्लीनिक अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिए जबकि इस समय कम से कम डॉक्टरों से उम्मीद की जाती है थी कि वह मुसीबत की इस घड़ी में सेवा भाव के साथ काम करेंगे और बीमार लोगों की सेवा और भी गंभीरता से करेंगे. वाक्या गत दिवस का है सर्दी जुखाम बुखार के चलते कुछ लोग डॉक्टरों के क्लीनिक के चक्कर लगा रहे थे और डॉक्टर क्लीनिक से गायब थे क्लीनिक में मौजूद इन डॉक्टरों का स्टाफ बस यही कह रहा था कि अभी बता नहीं सकते हैं कब तक डॉक्टर बैठेंगे इसके साथ ही स्टाफ यह भी जोड़ देता कम से कम चार-पांच दिन तो नहीं बैठेंगे यह मान कर चलिए हालात यह है जिन्हें अपने फैमिली डॉक्टर डॉक्टरों पर काफी भरोसा था विमान के चलते थे कि मुसीबत की घड़ी में वह हमारे काम आएंगे मैं डॉक्टर डॉक्टर वह डॉक्टर भाग खड़े हुए ऐसे में यह जरूरी हो जाता है। उत्तर प्रदेश योगी सरकार ऐसे चिकित्सकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें जिन्होंने महामारी की इस घड़ी में अपने क्लीनिक निजी स्वार्थ बस बंद कर दिए अच्छा होता कि ऐसे डॉक्टरों की सेवा ही खत्म कर दी जाती वरना कम से कम योगी सरकार ऐसे डॉक्टरों को जिम्मेदारी देते हुए सरकारी अस्पतालों में तो कुछ समय के लिए सेवारत कर ही सकते हैं ताकि सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों का जिम्मेदारी थोड़ी कम कर जा सके और मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके वरना तो मरीजों का डॉक्टर से पहले ही विश्वास उठा हुआ था इसमें और भी चार चांद लग जाएंगे बहरहाल सब डॉक्टर एक से नहीं है कई ऐसे भी हैं जो और भी ज्यादा समय अपने मरीजों को दे रहे हैं।लखनऊ के मौकापरस्त इन डॉक्टरों के बारे में पड़ताल करने के लिए जब यह संवाददाता किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी चैक लखनऊ के सामने स्थित सुभाष कांप्लेक्स में गया जहां दर्जनों की तादात में डॉक्टर बैठते हैं वहां से मुश्किल मुश्किल से 24 डॉक्टर ही मरीजों को देखते न जाना है नजर आए खासकर ई एन टी और जनरल फिजिशियन में अपनी क्लीनिक पर ताला लगा रखा है आर्थोपेडिक गैस्ट्रो Skin आदि के डॉक्टर कि बैठे नजर आ रहे थे एक तरफ मोदी जी कहे रहे है। कोरोना से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर जुटे हमारे डाॅक्टरों, सफाई, कर्मचारियों पुलिस आदि लोगों का कल 22 तारीख शाम 5 बजे साइरन बजने पर 5 मिनट तक घरों की कैसे खिड़कियों, बालकानियों छतों पर चढ़कर थाली और ताली बजाकर इन लोगों का उत्साहवर्द्धन किया जाए।
वह निजी चिकित्सक अगर महावारी के समय अपने क्लीनिक बंद कर देता है तो इन निजी चिकित्सकों के खिलाफ क्या कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि एक तरफ सरकारी डाॅक्टरों की छट्टियां रद्द की जा रही। वही ये लोग(निजी चिकित्सक) क्लीनिक बंद करके घरों में बैठे गये।

अजय कुमार, लखनऊ

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