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ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित पुरुष का सफलतापूर्वक इलाज

विजय न्यूज़ ब्यूरो
मैक्स हॉस्पिटल पटपड़गंज में 53 वर्षीय चंद्र मोहन के ब्रेस्ट कैंसर का सफलतापूर्वक इलाज किया गया। 4 साल पहले मरीज के दाएं स्तन में थक्के हो गए थे, काफी समय बाद निदान करने के बाद पता चला कि उसे दूसरे चरण का ब्रेस्ट कैंसर है। मरीज को अस्पताल में न सिर्फ गंभीर हालत में बल्कि उच्च रक्तचाप और मोटापा जैसी घतक बीमारियों के साथ भर्ती किया गया था। सारी जांचों के बाद टॉक्टरों की टीम ने मरीज पर कीमोथेरेपी करने का फैसला किया।
पटपड़गंज स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की ऑन्कोलॉजी व हिमेटोलॉजी विभाग की निदेशक, डॉ. मीनू वालिया ने बताया कि, “मरीज पहले तंबाकू का सेवन करता था, जिसके कारण वह पहले ही कई सर्जरियों से गुजर चुका था। उसकी हालत को देखते हुए उसे तुरंत कीमोथेरेपी पर रखा गया। कीमोथेरेपी के कुछ सेशन्स के बाद मरीज अब पूरी तरह से ठीक है और एक अच्छा जीवन जी रहा है।”
ऐसे समाज में जहां लोग प्राइवेट अंगो से संबंधित समस्याओं के बारे में बात करने से भी झिझकते हैं, वहां इस बीमारी के साथ जीना बहुत ही चुनौतीपूर्ण होता है। विशेषकर पुरुषों के लिए यह अधिक चुनौतीपूर्ण बन जाता है, इसलिए लोगों को इस बीमारी के लक्षण, रोकथाम के तरीके व इलाज के परिणामों के बारे में जागरुक करना आवश्यक है। लोगों को यह समझाने की आवश्यकता है कि वे ऐसी बीमारी का नाम सुनकर घबराने की बजाए उनपर खुलकर चर्चा करें।
डॉ. मीनू वालिया ने आगे बताया कि, “शुरुआती निदान के साथ पुरुषों के ब्रेस्ट कैंसर का इलाज करना आसान होता है। हालांकि, जागरुकता में कमी के कारण अक्सर निदान देर से होता है। जहां कुछ महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों के बारे में पता है, वहीं पुरुषों में इसकी न के बराबर जानकारी होती है, जिसके कारण उनका निदान देर से हो पाता है। आंकड़ों के अनुसार, 40 प्रतिशत पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर का निदान एडवांस स्टेज में होता है, जिसके कारण महिलाओं की तुलना में पुरुषों के बचने की संभावनाएं कम होती हैं।”
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रेस्ट कैंसर एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर है। पुरुषों में होने वाला ब्रेस्ट कैंसर मोटापा और टेस्टीकुलर डिसॉडर से संबंधित होता है। जिन दवाइयों से हार्मोन्स में बदलाव आते हैं, जैसे कि प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में इस्तेमाल की गई दवाइयों से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ता है।

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