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कोरोना संकट को लेकर सजग मोदी सरकार

कोरोना वायरस संकट को लेकर केन्द्र की मोदी सरकार पूरी सजगता से कार्य कर रही है। समय रहते पूरे देश में लाकडाउन करने का फैसला लेकर केन्द्र सरकार ने देश में कोरोना के व्यापक फैलाव को रोकने में काफी हद तक नियंत्रण कर लिया है। लाकडाउन के दौरान देश के कई प्रदेशों में प्रवासी मजदूरों के पलायन पर भी केन्द्र सरकार ने सख्त रूख अपनाकर उनको उनके मौजूदा स्थान पर ही शिविर बनाकर रोक दिया। जिससे लोगों के आवागमन पर रोक लग सकी। सरकार ने सभी राज्य सरकारों से समन्वय स्थापित कर शिविरों में रोके गये लोगों के भोजन, आवास व चिकित्सा की पूरी व्यवस्था करवायी है। जिससे लोगों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं उठानी पड़े।

हाल ही में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, सभी केंद्रीय मंत्री, लोकसभा व राज्यसभा के सभी सांसद, सभी प्रदेशों, केंद्र शासित प्रदेशों के राज्यपाल, उपराज्यपाल व प्रशासकों के मूल वेतन की 30 फीसदी राशि में आगामी एक वर्ष तक कटौती करने का निर्णय लिया है। जिसकी पूरे देश में सराहना हो रही है। इसके साथ ही देश के राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति ने भी स्वेच्छा से आगे आकर आगामी एक वर्ष तक अपने वेतन से 30 फीसदी राशि कटवाने की घोषणा की है।

देश के सभी सांसदों के मूल वेतन से प्रतिमाह 30 हजार रूपये काटे जायेगें जिसका उपयोग कोविंद 19 रिलीफ फंड में किया जाएगा। देखने में तो यह एक बड़ा फैसला है। लेकिन इससे सांसदों, मंत्रियों के ऊपर ज्यादा असर नहीं होगा। क्योंकि देश के सभी सांसद को मूल वेतन से कई गुना अधिक विभिन्न प्रकार के भत्ते मिलते हैं तथा सरकार द्वारा उन्हें निशुल्क आवास सहित अन्य कई प्रकार की सुविधाएं प्रदान की जाती है। जिन पर सरकार के हर सांसद पर लाखों रुपए प्रतिमाह खर्च होते हैं। ऐसे में सांसदो के मूल वेतन के बजाय कुल आय से कटौती का निर्णय किया जाता तो और भी अधिक उपयोगी होता। लेकिन फिलहाल जो किया गया है उसे भी लोग अच्छा मान रहे हैं।

इसके साथ ही केंद्र की मोदी सरकार ने सभी सांसदों को मिलने वाले सांसद क्षेत्रीय विकास कोष को भी आगामी 2 साल तक के लिये स्थगित करते हुए उसको उसकी राशि कोरोना पीडि़तों की मदद में लगाने की घोषणा की है। देश के सभी लोकसभा व राज्यसभा सांसदों को प्रतिवर्ष पांच करोड़ रूपये का क्षेत्रीय विकास कोष मिलता है। सांसद क्षेत्रीय विकास कोष से सरकार को आगामी 2 वर्षों में कुल 7900 करोड़ रूपये मिलेगें जिनका उपयोग कोरोना संकट के राहत कार्यों में किया जायेगा।

मोदी सरकार द्वारा आगामी 2 वर्षों तक सांसद कोष को स्थगित किए जाने के निर्णय का कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे सांसद अपने क्षेत्र में अपनी इच्छा अनुसार कोई विकास कार्य नहीं करवा पाएगा। लेकिन केंद्र सरकार के इस फैसलों को आम जनता का भरपूर सहयोग मिल रहा है। देश में वर्षों से सांसदों को मिलने वाले भारी भरकम वेतन भत्तों व क्षेत्रीय विकास कोष में आए दिन होने वाली गड़बडिय़ों को लेकर लोग विरोध करते रहे हैं। कोरोना संकट के समय में मोदी सरकार ने सांसद कोष को स्थगित करने का फैसला लिया है वह एक अच्छा कदम माना जा रहा है।

देश में जब से वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का संकट आया है तब से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी सक्रियता व सजगता से इस संकट का मुकाबला करने में जुटे हुए हैं। वो लगातार देश की जनता का मनोबल बढ़ा रहे हैं व इस संकट से जनता को निजात दिलाने के उपाय कर रहे हैं। इसी श्रंखला में केंद्र सरकार ने 21 दिन का लाकडाउन करने का फैसला लिया। जिसके अच्छे परिणाम भी मिलने लगे थे। मगर अचानक की दिल्ली की मरकत में आयोजित तबलीकी जमात में शामिल होकर देश भर में फैल गये हजारों लोगों के माध्यम से अचानक पूरे देश में कोरोना का तेजी से विस्तार हो गया। जमात से निकल कर विभिन्न प्रदेशों में गये हजारो लागों कोरोना पाजिटिव पाये गये। इससे सरकार के सामने फिर से कोरोना का संकट पैदा हो गया।

कोरोना संकट के चलते जैसे ही केंद्र सरकार ने पूरे देश में लाख डाउन का फैसला किया उसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने आर्थिक पैकेज की घोषणा की ताकि लोगों को राहत मिल सके। केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों के साथ समन्वय स्थापित कर लाकडाउन के दौरान अपने कार्य स्थलों से अपने घरों की तरफ पलायन कर रहे लोगों को रोकने के लिए देशभर में विभिन्न राहत शिविर बनाए गए जहां उनको रहने खाने चिकित्सा की पूरी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। केंद्र सरकार द्वारा देश की अधिकांश जनता को लाकडाउन के दौरान नगद राशि व मुफ्त अनाज का वितरण किया जा रहा है जिससे लोगों को काफी राहत मिली है। केंद्र सरकार ने कोरोना संकट से मुकाबला करने के लिए देश में आइसोलेशन केन्द्रो की संख्या में तीव्र वृद्धि की है तथा कोरोना वायरस की जांच केंद्रों का दायरा भी बढ़ाया है। इसके साथ ही सरकार देश, विदेशों से आवश्यक चिकित्सा सामग्री खरीद रही है।

लाकडाउन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निरंतर लोगों से संपर्क कर रहे हैं। उन्होंने देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों, विदेशों में कार्यरत भारतीय राजदूतों ,विभिन्न समाचार पत्रों, टीवी चैनलों के संपादकों, देश के प्रमुख उद्योगपतियों, खिलाडिय़ों, विभिन्न धर्मो के धर्मगुरुओं व कई राजनीतिक दलों के अध्यक्षों से भी कोरोना संकट को लेकर चर्चा की तथा उनसे कोरोना वायरस से बचाव को लेकर उनके सुझाव भी लिए। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रतिभा पाटील, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, एच डी देवेगोडा़ से भी कोरोना संकट को लेकर विस्तृत चर्चा की है।

कोरोना संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश विदेशों में प्रतिदिन सैकड़ों लोगों से व्यक्तिगत बातचीत कर रहे हैं तथा उनके सुझाव लेतेे हैं। केंद्र सरकार ने भारतीय रेल के डिब्बों को भी आइसोलेशन वार्ड के रूप में तैयार करवाया है ताकि भविष्य में जरूरत पडऩे पर आइसोलेशन वार्डो की कमी ना रहे। प्रधानमंत्री वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कैबिनेट की मीटिंग कर रहे हैं तो निरंतर चिकित्सकों से भी संवाद कर रहे हैं।

ऐसे संकट काल में भी कांग्रेस पार्टी प्रधानमंत्री मोदी के फैसलों पर लगातार सवाल उठा रही है तथा उनकी आलोचना करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी लगातार देश में लगाये गये लोकडाउन लागू करने के फैसले की आलोचना कर रहें है। वो इसे हड़बड़ी में लिया गया फैसला बता रहें है। अब तो कांग्रेस के सांसदों ने संसदीय क्षेत्रीय विकास कोष को आगामी 2 वर्षों तक स्थगित किए जाने का फैसले का भी खुलकर विरोध कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च को पूरे देश में जनता कफ्र्यू लागू कर पूरे देशवासियों को एक सूत्र में बांध दिया था। मोदी ने गत 5 अप्रैल की रात को 9:00 बजे घरों की रोशनी बंद कर दीपक मोमबत्ती जलाने को कहा था जिसका भी पूरे देश के लोगों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अनुसरण किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इन फैसलों से कोरोना वायरस से डर रहे लोगों के मन में एक नए उत्साह का संचार हुआ है। साथ ही पूरा देश एकजुटता से कोरोना का मुकाबला करने को भी तत्पर हुआ है।

रमेश सर्राफ धमोरा
स्वतंत्र पत्रकार

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