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मूवी रिव्यू : दबंग 3

‘दबंग’ की फ्रेंचाइजी को आगे बढ़ाते हुए प्रभुदेवा अगर ‘दबंग 3’ के साथ प्रस्तुत हुए हैं, तो यकीनन वह इसे सलमान खान के फैन्स को ध्यान में रखकर ही लाए हैं। इस फ्रेंचाइजी की पिछली दो फिल्मों को उनके चाहनेवालों ने हाथों-हाथ लिया है और अब ‘दबंग 3’ पिछली फिल्मों की प्रीक्वल है। जब से इस फिल्म की घोषणा हुई है तभी इसका इंतजार किया जा रहा है।

कलाकार : सलमान खान, सई मांजरेकर, सोनाक्षी सिन्हा, अरबाज खान, किच्चा सुदीप, टीनू आनंद, महेश मांजरेकर, नवाब शाह, वरीना हुसैन, डिंपल कपाड़िया
निर्देशक : प्रभुदेवा
मूवी टाइप : ऐक्शन,ड्रामा
अवधि : 2 घंटा 23 मिनट

कहानी: कहानी की शुरुआत ऐक्शन और कॉमिक अंदाज में होती है, जहां चुलबुल पांडे (सलमान खान) एक शादी में लूटे गए सोने के गहनों को गुंडों से बचाकर उसे वापस दिलवाता है। इस केस को सुलझाते हुए चुलबुल का सामना खूंखार माफिया सरगना बाली (सुदीप किच्चा) से होता है, जहां चुलबुल को अतीत के अपने वे तमाम घाव याद आ जाते हैं, जो अभी भी हरे हैं। बाली ही वह दरिंदा था, जिसने पास्ट में चुलबुल से सबकुछ छीन लिया था। अब जबकि बाली एक बार फिर चुलबुल की जिंदगी में तबाही लाना चाहता है, तो चुलबुल के लिए जरूरी हो जाता है कि वह अपनी वर्दी के फर्ज के साथ-साथ परिवार की भी रक्षा करे। अपनी पत्नी रज्जो (सोनाक्षी सिन्हा) से मिलने से पहले चुलबुल खुशी (सई मांजरेकर) से मोहब्बत करता था। असल में चुलबुल की मां (डिंपल कपाड़िया) ने खुशी को चुलबुल के भाई मक्खी (अरबाज खान) के लिए पसंद किया था, मगर मक्खी को शादी करने में कोई रुचि नहीं थी, तो चुलबुल और दहेज परंपरा के खिलाफ जाकर अपनी मंगेतर खुशी को डॉक्टर बनाने के लिए कटिबद्ध है, मगर तभी उनके प्यार पर ग्रहण लग जाता है। बाली की नजर खुशी पर पड़ती है और वह खुशी को पाने के लिए उतावला होकर कुछ भी करने पर आमादा है। बाली ने चुलबुल के साथ अतीत में ऐसा क्या किया था कि चुलबुल के लिए हिसाब चुकाना जरूरी था? क्या वह बाली से बदला ले पाएगा? क्या वह अपने फर्ज पर कायम रह पाएगा? यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।

डायरेक्शन: निर्देशक के रूप में प्रभुदेवा ने वह सब दिया है, जो सलमान खान के फैन्स देखना चाहते हैं। इस चक्कर में उन्होंने खुद को दोहरा भी दिया है। इस बार उन्होंने सलमान की लार्जर देन लाइफ छवि को और ज्यादा ग्रैंड कर दिया है। कई सीन्स ऐसे हैं, जो फ्रंट बेंचर्स को सिक्के उछालने और सीटी बजाने पर मजबूर कर देंगे। परदे पर यह पुलिसवाला एक ही समय पर अनेकों गुंडों को मारकर धूल चटाने में माहिर है। बलिष्ट बॉडी के साथ भाई का शर्टलेस होना हो या फिर सोनाक्षी और सई के साथ ठुमके लगाना हो, हर ऐक्ट में उन्होंने सलमान का खूब उपयोग किया है, मगर कहानी को वह पूरी तरह से उपेक्षित कर गए हैं। फिल्म की लंबाई पर भी प्रभु ध्यान देते, तो फिल्म और क्रिस्पी हो सकती थी। फिल्म के कुछ ऐक्शन दृश्य कमाल के हैं। स्लो मोशन में फिल्माए गए सीन हों, या क्लाइमैक्स की फाइट, रॉ ऐक्शन बहुत ही रोमांचक है। फिल्म के तमाम मसालों में प्रभु ने दहेज, नोटबंदी, पानी के सरंक्षण जैसे मुद्दों को भी डाल दिया है। कई कॉमिक सीन फूहड़ हैं।

संगीत: मगर संगीत की बात करें, तो साजिद-वाजिद के संगीत में ‘मुन्ना बदनाम हुआ’ रेडियो मिर्ची के दसवें पायदान पर है, तो ‘आवारा’ और ‘हुड हुड’ भी पसंद किए जा रहे हैं।

ऐक्टिंग: इस बात में कोई दो राय नहीं कि रॉबिनहुड नुमा पुलिसवाले के रोल में सलमान का जलवा बुलंद है। उन्होंने चुलबुल को टिपिकल रूप से ‘सलमान खान’ अंदाज में निभाया है। ऐक्शन हो या रोमांस, हर जगह सलमान का स्वैग नजर आता है। परदे पर दीवार फाड़कर आनेवाला सीन हो या सई और सोनाक्षी से रोमांस की बात, सलमान कन्विंसिंग लगे हैं। बाली के रूप में सुदीप किच्चा का किरदार जितना दमदार है, उतने ही सशक्त अंदाज में उन्होंने उसे अदा किया है। यह खलनायक परदे पर बेहद डैशिंग लगा है। सोनाक्षी खूबसूरत लगी हैं, मगर उन्हें ज्यादा स्क्रीनस्पेस नहीं मिला है। नवोदित अभिनेत्री के रूप में सई प्यारी और मासूम लगी हैं। उनमें कई संभावनाएं हैं। अरबाज ने भूमिका के साथ न्याय किया है। सहयोगी कास्ट ठीक-ठाक रही।

क्यों देखेंसलमान खान के फैंस और मसाला फिल्मों के शौकीन यह फिल्म देख सकते हैं।

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