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मूवी रिव्यू : द बॉडी

साल 2012 में आई स्पैनिश मिस्ट्री थ्रिलर फिल्म ‘द बॉडी’ में जरूर कुछ खास रहा होगा, जिसकी वजह से उसने इंटरनैशनल स्तर पर फिल्ममेकर्स का ध्यान आकर्षित किया। यह फिल्म अब तक कन्नड़, तमिल और कोरियन भाषा में बन चुकी है, वहीं इंग्लिश में बनाए जाने की भी तैयारी चल रही है। लेकिन शुक्रवार को सिनेमाघरों में इसी नाम से रिलीज हुई इसकी हिंदी रीमेक वैसा जादू कतई नहीं जगा पाती। साउथ में ‘दृश्यम’ जैसी जबदस्त सस्पेंस फिल्म बना चुके निर्देशक जीतू जोसेफ की इस पहली हिंदी फिल्म से एक बढ़िया क्राइम थ्रिलर फिल्म की उम्मीद थी, लेकिन वह ऐसा कर पाने में चूक गए हैं।

कहानी: फिल्म में एक रईस बिजनसवुमन माया वर्मा (सोभिता धूलिपाला) की डेड बॉडी शवगृह से अचानक गायब हो जाती है, जिसकी तहकीकात एसपी जयराज रावल (ऋषि कपूर) करते हैं। शक की सुई माया के पति अजय पुरी (इमरान हाशमी) की ओर है, जिसका अपनी एक स्टूडेंट रितु (वेदिका) के साथ एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर है। लेकिन तहकीकात के दौरान ऐसे घटनाक्रम होते हैं कि अजय को लगता है कि माया जिंदा है और वह उसे फंसाने की कोशिश कर रही है। अब सच क्या है, यह जानने के लिए फिल्म देखनी होगी।

कलाकार : इमरान हाशमी, ऋषि कपूर, सोभिता धूलिपाला, वेदिका
निर्देशक : जीतू जोसेफ
मूवी टाइप : मिस्ट्री, थ्रिलर
अवधि : 2 घंटा 20 मिनट

रिव्यू: फिल्म का प्लॉट इंट्रेस्टिंग है, लेकिन स्क्रीनप्ले बेहद कमजोर है। ऐसा लगता है कि निर्देशक यह समझ ही नहीं पाए कि वह कहानी को किस तरह आगे बढ़ाना चाहते हैं। बार-बार आते फ्लैशबैक और रोमांटिक गाने सस्पेंस का पूरा मजा किरकिरा कर देते हैं। एकाध सीन के अलावा, पूरी फिल्म एक लैबोरेट्री में सेट है, जिसमें डॉक्टर महज एक बार नजर आती हैं। फिल्म का प्रॉडक्शन वैल्यू भी कमजोर है, जिसके चलते छोटे परदे के क्राइम सीरियल वाला अहसास होता है। यही नहीं, जीतू जोसेफ निर्देशक ऋषि कपूर, इमरान हाशमी, सोभिता धूलिपाला जैसे सक्षम ऐक्टर्स से भी उनका बेहतरीन काम नहीं ले पाए हैं। इनका अभिनय भी औसत है। फिल्म का इकलौता प्लस पॉइंट क्लाइमैक्स है, जबकि गाने सुरीले होते हुए भी फिल्म की गति में बाधक हैं।

क्यों देखें: थ्रिलर फिल्मों के शौकीन हैं, तो अपने रिस्क पर देख सकते हैं।

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