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मुक्तक

मुक्तक

हर चीज का हर एक असर याद रखती है
अच्छाई भूल जाए कसर याद रखती है
सदियों से सदियों तलक की है ये दुनिया
अवगुण गुणों को ये बराबर याद रखती है

प्रेम अपने-मेरे का हिसाब देना बस
जो टूट गए मेरे वही ख्वाब देना बस
गर सामने पडे़ तो मैं मांगूंगा कुछ नहीं
चंद सवालों का तुम जवाब देना बस

जो ना दे प्रेम वो फसल बोया नहीं कभी
दया का भाव दिल से खोया नहीं कभी
रोया भले मैं देखके दुनिया की चालढाल
व्यवहार से मेरे कोई रोया नहीं कभी

विक्रम कुमार
मनोरा , वैशाली

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