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ब्रेकिंग न्यूज़

मुक्तक

चल रहा इश्क आजकल , फसाना – सा है
ये महीना कुछ महीनों से दीवाना – सा है
अपनी संस्कृति अब ,जैसे भुलाने – सा है
हवस फरवरी की ये अब ,सड़कों पर
जैसे इस महीनें से मेरा वर्षगाँठ मिटाने – सा है ।।

मनकेश्वर महाराज “भट्ट”

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