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इसको पीते ही मेरे ख्वाब चमक जाते हैं

इसको पीते ही मेरे ख्वाब चमक जाते हैं,

तेरे हाथों से बने जाम महक जाते हैं।। .

मेरे जेहन में चुपके से आते हो,

मेरे ख्यालात भी बहक जाते हैं .।।

जब सावन में तुम गुनगुनाती हो,
बेजुबान मुस्कुरा कर चह्क जाते हैं ।।

झरोखे में आती हो जब झूम के।

चांद सितारे भी बहक जाते हैं ।।

चंदन सी महकती हो तुम ।
फिजा में फूल महक जाते हैं।।

रातों में संजीव आंचल जो लहराती हो ।
आदमी क्या फरिश्ते भी मचल जातेहै|

संजीव ठाकुर

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