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मेरे पिताजी ने एक बात बोली थी,फिल्मे चाहे हजार करलो आदमी बदल जाए वो आदमी क्या:कबीर दुहान सिंह

हरियाणा के फरीदाबाद से निकलकर साउथ फ़िल्म इंडस्ट्री में खलनायक की लोकप्रियता हासिल करनेवाले अभिनेता कबीर दुहान सिंह इन दिनों अपनी सीरीज़ ‘रामयुग’को लेकर काफी चर्चे मैं साथ ही उनके किरदार रावण के लिए अपने फैंस की ओर से काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही हैं इसके अलावा कबीर नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के पैरेलेल लीड में ‘बोले चूड़ियां’ फ़िल्म में नजर आएंगे उनके साथ हालही में हुई इंटरव्यू के दौरान बातचीत के मुख्य अंश पेश:-

 

‘रामयुग’में रावण का किरदार निभाने के लिए कैसी तैयारियां करती पड़ी?

जब मुझे ये किरदार मिला तो सबसे पहले मैंने मार्केट में जाकर एक किताब खरीदी जिनका नाम है रावण सरिता जिनमे रावण के बारे में सबकुछ है मेरे पास दो महीने थे कैरेक्टर को तैयार करने के लिए क्योंकि स्क्रिप्ट मेरे पास पहले से ही आ गई थी।और सिन पढ़कर कैरेक्टर तैयार करता था। और क्लाइमेक्स में जो तलवारबाजी थी वो भी मैंने सीखना शुरू किया।यूट्यूब पर रावण की हिस्ट्री देखी जो हमकों नही पता या दुनिया को नही पता। मैंने पूरा एफर्ट लगा दिया था इस किरदार को निभाने के लिए।

इसके अलावा आप आगामी कौन से प्रोजेक्ट में नजर आएंगे?

रामयुग सीरीज़ के बाद बॉलीवुड की एक फ़िल्म आ रही हैं ‘बोले चूड़ियां’जिनमे नवाजुद्दीन सिद्दीकी अपोजिट में है। उस फिल्म में विलेन नहीं हूं नवाजभाई के इकोल पेरेल में हु,उस फिल्म में रोमांस कर रहा हूं,कॉमेडी और एक्शन भी कर रहा हूं,और जो ऑडियंस ने मुझे अब तक विलेन के रोल में देखा वो अब मुझे अलग कैरेक्टर में देखेंगे । इसके अलावा मैंने इंग्लिश इंटरनेशनल बाग्लादेस की फ़िल्म साइन की है जिनमे में लीड हीरो हूं,और नितरी का लीडर फ़िल्म का नाम है।अभी परिस्थियां खराब होने के कारण शूटिंग रुकी हुई है।

आप शुरुआत से नेगेटिव रोल निभाते आए हैं नेगेटिव रोल को आप किस नजर से देखते है?

रामायण में अगर रावण को निकाल दो तो रामायण नही बनती वैसे ही फिल्म में से विलेन निकाल दो तो फ़िल्म कम्प्लीट नही होती मेरे लिए हीरो और विलेन दोनों बराबर है। मेरी चॉइस थी कि में अपना करियर विलेन से स्टार्ट करू,और भी दो तीन प्रोजेक्ट के लिए नरेशन दे चुका हूं विलेन के रोल के लिए। और अगर आपने नोटिस किया होगा तो हीरो से ज्यादा विलेन के फैंस ज्यादा होते है।

बॉलीवुड फिल्मों में बेहद कम नजर आये हैं क्या वजह है?

वजह कुछ नही है बल्कि पिछले साल काफी ऑफर आये थे,वो भी बड़ी फिल्मो के,लेकिन जो मेरा दिल कहता है वो में करता हूं,मैंने रास्ता थोड़ा लंबा अपनाया,में लोगों को अपना काम दिखाना चाहता था, और मुझे पहले बॉलीवुड फिल्म ढिशूम ऑफर हुई थी जो जॉन अब्राहम की है।मुझे उसमे कैरेक्टर के लिए बोला गया था लेकिन मेरी साउथ में दो बड़ी फिल्म रिलीज हो रही थी।और मुझे उस समय नही लगा कि बॉलीवुड में आने का यह सही समय है मेरा दिल कहेगा तब में बॉलीवुड की फिल्मे करूंगा।मैंने रामयुग सीरीज की और पिछले साल ‘बोले चूड़ियां’ साइन की तो अब मुझे लगता है बॉलीवुड में आने का सही समय है।

साउथ फ़िल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म जैसी चीजे आपने देखी है?

मैंने कभी सुना नही की साउथ में नेपोटिज्म हैं कनाडा,तमिल,और तेलुगु फिल्मो में देखो तो काम करने के लिए हर नया लड़का आता है नया विलेन आते है। मेरी जहन में नेपोटिज्म एक्जेस नहीं करता, मेरी जहन में एक ही बात है कि जो मेहनत करता है उसे काम जरूर मिलता है। हमें काम लेट से मिलता है हमे लगता है हम मेहनत कर रहे है काम नहीं मिल रहा,लेकिन कुछ चीजों के लिए टाइम लगता है में दो साल से बॉलीवुड मे हूं नवाजभाई को देखो बीस साल से स्ट्रगल कर रहे थे। वो आज भी कहते है कि मैंने कभी गिवप नही किया। बस मेहनत करते जाओ

कोरोना के चलते अपनी फिटनेस का ध्यान कैसे रखते हैं?

एक लाइन ही बोलूंगा की ‘जो फिट है वो हिट है’ और लास्ट ईयर लोकडाउन था तो सबसे पहले मैंने समझदारी का काम यह किया था कि रॉड वगैरा जिम का सामान घर ले आया था। तो में हरोज़ सुबह उठकर मेडिटेशन और योगा करता हूं,पहले जो मेरा टाइम टेबल था वही टाइम टेबल है ऐसा नही है कि मैं लेट उठता हु बस थोड़ा यह है कि पोस्ट करता रहता हूं लोगों की हेल्प के लिए, किसी को ब्लड वगेरा चाहिए होता है तो थोड़ा ऊपर नीचे हो जाता हैं।

अभिनेता बनने के बाद आपके जीवन की ऐसी कौनसी चीज़ है जो कभी बदली नही है?

मेरे पिताजी ने एक बात बोली थी “फिल्मे चाहे हजार करलो आदमी बदल जाए वो आदमी क्या” में जो पहले था वैसा आज भी हूँ मैं अपने काम को और फैमिली को महत्व देता हूं और कोशिश करता हूं किसी का दिल न दुखे।

 

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