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मेरी प्रेरणा मेरी दीदी

ये जो तुम माधुरी की तरह हँसती हो,सच बहुत कुछ कहती हो,
तुम्हे देखना हमेशा ही बड़ा मजेदार ,ओर कभी भावुक ,और कभी प्रेरणा और कभी पता नहीं क्या क्या ,
तुम रश्मि हो ,रोशनी हो पर तुम हिम्मत हो,सहारा हो तुम आभिब्यक्ति हो।
तुम पहाड़ो को काटकर रास्ता बनाती ,स्वछन्द बहती हो,
तुम जंगल में खिले फूलो की महक हो,
तुम रश्मि ,जो अकेली खड़ी स्तबध सब कुछ देख रही हो,सुन रही हो,
ओर फिर सबसे कह रही हो,
में रश्मि हूँ मुझे बांध ना पाओगे,
में रश्मि हूँ मुझे कैद ना कर पाओगे,
में रश्मि हूँ सदा से स्वतंत्र अपनी ही विभा ,प्रभा,ज्योत्स्ना,ज्योति ओर दीप्ति को अपने में समाहित किये ,में पूर्ण होती हूँ
मै रश्मि हूँ ,में नूतन सुबह लाती हूँ,
मै रश्मि हूँ मै आज़ाद रहती हूँ।

 

ज्योति तिवारी

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