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शिक्षा जगत में नई ऊर्जा- शिक्षा का परिधान ‘नो बैग डे’

शिक्षा किसी समाज में सदैव चलने वाली सामाजिक प्रक्रिया है। शिक्षा का महत्व व्यक्ति के प्रत्येक पहलू को विकसित करके बालक का चारित्रिक निर्माण करना है। इसके द्वारा व्यक्ति की जन्मजात शक्तियों का विकास किया जाता है। उसके ज्ञान-कौशल में अभिवृद्धि की जाती है। उसमें अवबोध का जागरण किया जाता है। देश व समाज की अपेक्षा के अनुरूप उसके व्यवहार में परिवर्तन किया जाता है। शिक्षा राष्ट्रीय जीवन में व्यक्ति के भीतर राष्ट्रीय एकता, भावनात्मक एकता, सामाजिक कुशलता तथा राष्ट्रीय अनुशासन आदि भावना को विकसित करके उसे इस योग्य बना देती है कि वह सामाजिक कर्तव्य को पूरा करते हुए राष्ट्रीय हित में संवैधानिक मूल्यों को प्राथमिकता देने के लिए ओत-प्रोत हो जाए। इस प्रकार उसे सभ्य, सुसंस्कृत एवं योग्य नागरिक बनाया जाता है।

स्पष्ट है कि शिक्षा का अर्थ केवल किताबी तथ्यों को रट लेना और परीक्षा में अच्छे नंबरों से पास हो जाना कतई नहीं है। न ही शिक्षा का उद्देश्य कुछ किताबें पढ़ कर सरकारी नौकरी पा लेना है। सच तो यह है कि शिक्षा किसी भी बालक के बीज रूप को पहचान कर उसमें वृक्ष बनने की समस्त संभावनाओं को अभिप्रेरित करने का सात्विक कर्म है। इसी शिक्षा शास्त्रीय अवधारणा को साकार करने के उद्देश्य से राजस्थान के सरकारी स्कूलों में ‘नो बैग डे’ के रूप में नई रचनात्मक पहल की गई है। राजस्थान में सभी सरकारी स्कूलों में शनिवार को ‘नो बैग डे’ आयोजित किया जाएगा। इसका मतलब हर शनिवार को स्कूल जाने पर छात्रों को बैग लेकर नहीं जाना पड़ेगा। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने कार्यकाल का दूसरा बजट पेश करते हुए यह बात कही है। ‘नो बैग डे’ के पीछे उनका उद्देश्य स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों पर से पढ़ाई का बोझ कुछ हद तक कम करना एवं बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है। पिछले कई वर्षों से अनेक शिक्षाशास्त्री, मनोवैज्ञानिक और समाजशास्त्री दोहरा रहे हैं कि हमारी शिक्षा-परीक्षा प्रणाली बहुत मशीनी होती जा रही है। अंक केंद्रित मूल्यांकन पद्धति ने बच्चों को गहरे दबाव व अवसाद में डाल दिया है, जिससे उनकी सहजता नष्ट हो रही है। वे बेहद चिड़चिड़े और अवसादग्रस्त होते जा रहे हैं। तब शिक्षा शास्त्रियों के विचार के अनुरूप ‘नो बैग डे’ एक महत्वपूर्ण व्यवस्था साबित होगी।

राजस्थान सरकार का पांचवा संकल्प ‘शिक्षा का परिधान’ में सभी सरकारी स्कूलों में शनिवार के दिन ‘नो बैग डे’ रखने का निर्णय लिया है। इस दिन कोई अध्यापन कार्य नहीं होगा और इस दिन अभिभावक अध्यापक मिलकर बच्चों को समग्र विकास के अवसर भी देंगे और जीवन मूल्यों के जागरण के लिए उपयुक्त वातावरण भी। इसके अलावा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां संचालित की जाएगी। बालकों के समग्र विकास के लिए कई तरह की गतिविधियां संचालित करने में यह दिन ‘हैप्पीनेस थेरेपी’ के रूप में भी दिखाई पड़ेगा। इसके अन्तर्गत बच्चों की आयु और कक्षा के मुताबिक ‘हैप्पीनेस एक्टिविटीज’ कराई जाएगी। ये सब अभिव्यक्ति आधारित गतिविधियाँ होगी। सप्ताह भर में कराई गई गतिविधियों पर बच्चे अपने विचार व्यक्त करेंगे। जो बच्चे झिझकते हैं, वे भी शिक्षक द्वारा प्रोत्साहित करने पर अपने विचार व्यक्त करने लगेंगे। समग्र व्यक्तित्व विकास, खेलकूद, स्काउट और जीवन मूल्य के साथ-साथ नैतिक शिक्षा आधारित गतिविधियां संचालित की जाएगी। बालसभा तथा भाषा एवं कौशल विकास संबंधी विभिन्न प्रकार की स्कूली अवधारणा विकसित की जाएगी। स्काउटिंग के मूल्यों को आरोपित करने के लिए भी यह अवसर प्रभावी बन सकेगा। शनिवार को बच्चों की गतिविधियों में शिक्षकों की पूर्ण भागीदारी बनी रहेगी।

हर एक बच्चा अद्भुत होता है, वह महान होता है। हमें जरूरत है उनके भीतर मौजूद बीज रूपी आत्म तत्व को उद्घाटित करने की। यह अवधारणा शनिवार को आयोजित होने वाले ‘नो बैग डे’ में प्रकट होती दिखाई पड़ रही है। शिक्षा के रास्ते कौशल के अवसर थमाते हुए और स्कूली बच्चों को राहत देते हुए सप्ताह में 1 दिन सरकारी स्कूलों में बस्ता लेकर नहीं जाने पर इस व्यवस्था में भारी उत्साह दिखाई दे रहा है। जरूरत है कि इस ‘नो बैग डे’ को शिक्षा अधिकारी बहुत ही प्रभावी और योजनाबद्ध तरीके से इसके लागू करें। शिक्षकों में इसके प्रति आस्था जगाएं। शिक्षकों को बच्चों में विभिन्न कौशलों को पैदा करने व पुनर्जीवित करने के लिए संबलन दिया जाए। अगर शिक्षा जगत व शिक्षक मिलकर ‘नो बैग डे’ को विशिष्ट अवसर समझ कर बालकों में अंतर्निहित शक्तियों का विकास कर सके तो यह शिक्षा क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम होगा। हालांकि कई राज्यों में ‘नो बैग डे’ पहले ही संचालित किया जा रहा है। तब इसे योजनाबद्ध तरीके से, सूक्ष्म नियोजन करके, पूर्ण संकल्प के साथ में विद्यालयों में शिक्षकों को विश्वास में लेकर आगे गति देनी चाहिए। इसे प्रभावी तरीके से संचालित करने से न केवल शिक्षकों में उत्साह का संचार होगा बल्कि विद्यार्थियों में भी एक नई ऊर्जा और नई चेतना का विकास होगा। विद्यार्थी अपने व्यक्तित्व के संपूर्ण विकास के लिए विद्यालय की भूमिका को सार्थक कर पाएंगे।

रामविलास जांगिड़, प्रधानाचार्य
राउमावि गवाड़िया, अजमेर

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