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पौष्टिक आहार स्वस्थ जीवन का आधार

पौष्टिक आहार को लेकर दुनियां में व्यापक हलचल मची है। आहार मनुष्य की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण आधारभूत आवश्यकता है जिसके बिना कोई भी प्राणी जीवन की कल्पना नहीं कर सकता है। एक रिपोर्ट में बताया गया है की विश्व में हर साल लाखों लोगों की मौत पौष्टिक आहार न लेने की वजह से हो रही है। ये मौतें जागरूकता के आभाव में हो रही है जब की दुनियां में पौष्टिक आहार की कोई कमी नहीं है। गरीब और अमीर सभी वर्ग के लोग पौष्टिक आहार नहीं लेने से अकाल मृत्यु को प्राप्त हो रहे है जो बेहद चिंताजनक है। दुनिया में प्रचुर खाद्यान्न उत्पादन होने के बावजूद लोगों के लिए स्वास्थ्यपरक आहार आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसके चलते प्रतिवर्ष 1.10 करोड़ लोगों की समयपूर्व मौत होने का अनुमान है। स्वास्थ्यकर भोजन अपनाने से इन मौतों को रोका जा सकता है। रिपोर्ट में 190 देशों के खान-पान के आंकड़े एकत्र किए गए हैं। इसमें पौष्टिक भोजन की कमी और जरूरत से ज्यादा कैलोरी भोजन लेने से उत्पन्न कारणों का जिक्र करते हुए बीमारियों के खतरे का जिक्र है। रिपोर्ट के अनुसार बीमारियों के 11 बड़े कारणों में खान-पान से जुड़ा खतरा सबसे बड़ा है। आने वाले समय में यह चुनौती और बड़ी होगी।
आहार हमारे जीवन की प्राथमिक आवश्यकता है। इससे हमें ऊर्जा मिलती है । जब तक आहार में पौष्टिक तत्व नहीं होंगे तब तक शरीर का विकास उचित प्रकार से नहीं होता है। आहार में पौष्टिक तत्व होने आवश्यक है जो शरीर का वर्द्धन करें। हमारे देश में गरीबी एवं अज्ञानता के कारण भोजन में पौषक तत्वों की कमी रहती है। इन्ही कारणों से बच्चों में कुपोषण एवं वयस्कों में कई विकार उत्पन्न होते है। आहार में कार्बोज, प्रोटीन, वसा, खनिज लवण एवं विटामिन विद्यमान हो तभी व्यक्ति की शारीरिक वृद्धि एवं विकास होगा। इस प्रकार के आहार में जल एवं फाइबर की भी पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए।
दुनिया के अनाज निर्यातक देशों में भारत का प्रमुख स्थान है। फल और चावल के उत्पादक देशों में भारत दूसरे नंबर पर है। भारत खाद्यान्न उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर है। इसके बावजूद यहां के बच्चों में आयरन और जिंक की लगातार कमी बनी हुई है। चैंकाने वाली बात यह है कि इन पोषक तत्वों की यह कमी केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों में ही नहीं बल्कि उन बच्चों में भी पाई गई है जिन्हें पोषण के लिए पर्याप्त आहार मिलता है। आहार मनुष्य की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण आधारभूत आवश्यकता है जिसके बिना कोई भी प्राणी जीवन की कल्पना नहीं कर सकता है।
एक अध्ययन के अनुसार भारत में प्रोटीन को गैरजरूरी पोषक तत्व समझा जाता है। करीब 93 प्रतिशत भारतीयों को पता ही नहीं है कि एक आदर्श प्रोटीन आहार क्या है? शायद यही वजह है कि 73 प्रतिशत भारतीयों के आहार में प्रोटीन की कमी रहती है। मांसाहारी भोजन करने वालों में 64 प्रतिशत तक प्रोटीन की कमी पायी गयी है। वहीं शाकाहारी भोजन में इसकी कमी चिंताजनक स्तर 84 प्रतिशत तक पाई जाती है। डॉक्टर बताते हैं कि शरीर के वजन के प्रति एक किलोग्राम पर 1 ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए। हालांकि गर्भावस्था और अन्य स्थितियों में इसकी मात्रा अलग हो सकती है। हमारे शरीर को अमीनो एसिड की भी आवश्यकता होती है। इसे पूरा करने के लिए भी प्रोटीन लेना जरूरी है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार भोजन में अनाज और दालों का अनुपात 5 और 1 होना चाहिए। लेकिन भारतीय आहार में भोजन का 60 प्रतिशत हिस्सा तो अनाज का होता है। अनाज भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। लेकिन उनमें आवश्यक अमीनो एसिड नहीं होता हैं। मिथियोनीन नामक प्रोटीन दालों में मिलता है, जो विकास और ऊतकों की मरम्मत के लिए आवश्यक है।

बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
डी . 32 माॅडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर
मो.- 9414441218

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