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मोटापा, बीमारी नहीं बीमारियों का जनक

शाहिद नकवी

मोटापा एक मेडिकल कंडीशन है,जिसमें शरीर पर वसा की परतें इतनी मात्रा में जम जाती हैं कि ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो जाती हैं। आज दुनिया की कम-से-कम 20 प्रतिशत आबादी मोटापे से ग्रस्त है, यानी दुनियाभर में लगभग 2 अरब 10 करोड़ लोग मोटापे के शिकार हैं,चिंता का विषय है। मोटापे को बीमारी नहीं माना जाता,लेकिन माना जाता है कि यह 53 बीमारियों की वजह बन सकता है।इसकी वजह से डायबिटीज,हाइपरटेंशन, हार्ट फेलियर,अस्थमा,कोलेस्ट्रॉल,अत्यधिक पसीना आना,जोड़ों में दर्द,बांझपन का खतरा बढ़ जाता है।खान-पान की गलत आदतें,जीवनशैली में बदलाव और शारीरिक सक्रियता की कमी के कारण यह समस्या लगातार गंभीर हो रही है नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार भारत में स्कूल जाने वाले 20 प्रतिशत बच्चे ओवरवेट हैं।आचार्य चरक के अनुसार अधिक मोटे व्यक्ति के शरीर में चर्बी ही बढ़ती है,अन्य धातुएँ उतनी नहीं बढ़तीं।मोटे व्यक्ति अल्पायु तो होते हैं,पुरुषत्वहीन,वीर्यविहीन,पसीने से परेशान, भूख-प्यास से व्याकुल तथा अनेक बीमारियों से ग्रस्त होते हैं।मोटा व्यक्ति भूख शांत करने के लिए नहीं खाता, बल्कि स्वादेन्द्रियों को शांत करने के लिए नाना प्रकार के भोजन करता है।मोटापा व्यक्ति की सुन्दरता नष्ट कर देता है और ज्यादा मोटापा समाज में हास्यास्पद स्थिति पैदा कर देता है।कई बार मोटापा वंशानुगत भी होता है।परिवार में सभी मोटे लोग हैं तो आने वाली संतान भी मोटी हो सकती है।जिस प्रकार खांसी को,कब्ज को रोग का घर कहा जाता है, वैसे ही मोटापे को भी कई बीमारियों का जनक माना जाता है।मोटापा शरीर के कुछ अंगों पेट,जाँघ, हाथ, नितम्ब,कमर आदि को अनावश्यक रूप से फुलाते हुए अपने आस-पास के अंगों को दबाता चला जाता है, इस तरह यह पूरे शरीर को अपने कब्जे में ले लेताहै।विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन का कहना है कि मोटापा न सिर्फ स्‍वास्‍थ्‍य को नुकसान पहुंचाता है,बल्‍कि यह हर साल आर्थिक और सामजिक बोझ भी बनता जा रहा है।

मोटापे को लेकर अक्सर डायटिशियन समाज को आगाह करते रहतें हैं।लेकिन समाज मे गम्भीर रूप ले चुके मोटापे पर इलाहाबाद विश्वविद्दालय की फूड प्रोसेसिंग विभाग की डाक्टर ईना कहती हैं कि लोग पारंपरिक भारतीय भोजन यानी दाल,चावल,रोटी और हरी सब्जी को किनारे कर पश्चिमी खाद्य संस्कृति को अपना रहे हैं।दरअसल ये तैयार करने में तो आसान जरूर हैं,लेकिन उनमे कैलोरी और अस्वास्थ्यकर परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट ज्यादा होते हैं।जिसकी वजह से आज लोगों का वजन तेजी से बढ़ रहा है।नतीजे मे कई तरह से शारीरिक विकार और बीमारी को जन्म हो रहा है।वह कहती हैं कि उनका नारा,घर की तरह भोजन छलावा मात्र है।अध्ययनों के अनुसार पिछले चार दशकों में फास्ट फूड की खपत खतरनाक दर से बढ़ी है।यह बढ़ी हुई कैलोरी का सेवन भारत में मोटापे का एक प्रमुख कारण है।यदि इसे नियंत्रित नहीं किया जाता है,तो आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य के मुद्दों में वृद्धि होने वाली है क्योंकि अधिक लोग अस्वास्थ्यकर फास्ट फूड खाने से मोटे हो जाएंगे।डॉ गुप्ता के अनुसार लोग गतिहीन जीवन शैली का पालन कर रहे हैं,वे योग, ध्यान या व्यायाम नहीं करते हैं, और सिर्फ भारी भोजन करके सो जाते हैं। जिससे वजन तेजी से बढ़ता है। डॉक्टर यह सुझाव देते हैं कि नाश्ता सबसे भारी होना चाहिए, फिर दोपहर का भोजन और सबसे हल्का रात का खाना है जो सोने से दो घंटे पहले लिया जाना चाहिए।मोटापे की प्रकृत के बारे मे डॉ ईना कहती हैं कि मोटापा बहुसांस्कृतिक लगता है, यानी कई जीनों और पर्यावरणीय कारकों के बीच जटिल बातचीत का परिणाम है।अध्ययनों ने कई जीनों में वेरिएंट की पहचान की है जो वजन बढ़ाने और शरीर में वसा वितरण में योगदान कर सकते हैं। अध्ययनों में मोटापे से जुड़े 50 से अधिक जीन पाए गए हैं।जिनमें में से एक लेप्टिन और लेप्टिन रिसेप्टर्स की कमी हो सकती है।लेप्टिन मुख्य रूप से वसा की छोटी आंत में कोशिकाओं और एंटरोसाइट्स द्वारा बनाया गया एक हार्मोन है जो भूख को रोककर ऊर्जा संतुलन को विनियमित करने में मदद करता है, जो बदले में वसा के भंडारण में वसा के भंडारण को कम करता है।लेप्टिन मुख्य रूप से वसा की छोटी आंत में कोशिकाओं और एंटरोसाइट्स द्वारा बनाया गया एक हार्मोन है जो भूख को रोककर ऊर्जा संतुलन को विनियमित करने में मदद करता है, जो बदले में वसा के भंडारण में वसा के भंडारण को कम करता है। मोटापा के अन्य कारणों में हाइपोथायरायडिज्म हो सकता है जहां शरीर के वजन, अवसाद, चिंता या तनाव में इन स्थितियों में व्यक्ति ओवरईटिंग करता है जिससे मोटापा हो सकता है। कुछ दवाएं विशेष रूप से स्टेरॉयड और कुछ एंटीडिप्रेसेंट, उच्च रक्तचाप और जब्ती दवाएं भी हैं जो शरीर के वजन को बढ़ाती हैं।लेकिन75 फीसद वजन हमारे भोजन के अनियमित प्रयोग से बढ़ता है। वह कहती हैं कि 45 मिनट के अभ्यास साथ एक स्वस्थ मेनू का पालन करके शरीर के वजन में वृद्धि को नियंत्रित किया जा सकता है।उनके मुताबिक दिन की तैयारी हर आदमी को एक गिलास गुनगुने पानी और नींबू की 5-6 बूंदों के साथ करनी चाहिए। फिर 45 मिनट तेज चलना भी आवश्यक है।वह नाश्ते में मिक्स वेजिटेबल डालिया ,उपमा,पोहा,चीला,ढोकला,इडली,ब्राउन ब्रेड वेजिटेबल सैंडविच और ओट्स के साथ-साथ एक गिलास टोंड दूध वा एक फल शामिल होने चाहिए। दोपहर के भोजन मे सलाद से भरी थाली, 1 कटोरी दाल, 2-3 रोटी, 1 कटोरी गहरे हरे पत्ते वाली सब्ज़ी और दही होना चाहिए।चावल से बचने की कोशिश होना चाहिए। शाम को कुछ साबुत अनाज के बिस्कुट के साथ एक कप चाय ली जा सकता है।रात का खाना हमेशा बहुत हल्का होना चाहिए और सोने से दो घंटे पहले लेना चाहिए जिसमें शामिल हैं,सलाद से भरी एक प्लेट, 2-3 रोटी और 1 कटोरी शब्जी बहुत है।डॉ गुप्ता ने कहती कि मधुमेह एक चयापचय विकार है,जो कार्बोहाइड्रेट का उपयोग करने के लिए शरीर की कम क्षमता और पूर्ण अक्षमता की विशेषता है और हार्मोन इंसुलिन की कमी या अक्षम उत्पादन है।अधिक वजन या मोटापे के कारण टाइप 2 मधुमेह के विकास के लिए एक व्यक्ति का जोखिम बढ़ जाता है।साथ ही, टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों में वजन बढ़ने से ब्लड शुगर लेवल भी नियंत्रित होना मुश्किल हो जाता है। वजन घटाने और व्यायाम के संयोजन से इंसुलिन प्रतिरोध बेहतर हो जाता है।

डायबिटिक व्यक्ति के आहार में कम ग्लाइसेमिक लोड वाला भोजन शामिल होता है जो रक्त शर्करा में वृद्धि का कारण बनता है। एक व्यक्ति को जटिल कार्बोहाइड्रेट शामिल करना चाहिए और उनका मेनू कमोबेश मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति के मेनू की तरह है,उन्हें साबुत अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां, पूरे फल, सलाद और अंकुरित अनाज खाने चाहिए। यह किसी भी रूप में चीनी से बचने के लिए आवश्यक है क्योंकि यह रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ाएगा। मोटापा कम करने के कुछ टिप्स देते हुए डॉ गुप्ता ने कहती कि नाश्ता न छोड़ें, सुबह खाली पेट चाय का सेवन करने से बचें,अपने दिन की शुरुआत एक गिलास गुनगुने पानी के साथ करें,इसके बाद व्यायाम करें, अक्सर जंक फूड और वसा वाले खाद्य पदार्थों के अत्यधिक सेवन से बचें।घर का बना पारंपरिक भोजन खाने की कोशिश करें और रोजाना कम से कम 10-12 गिलास पानी अवश्य पिएं।

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