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रसायन रिश्तों का

जीने के लिए सबसे आवश्यक “श्वांसहै”,फिर जल,फिर रोटी ,कपड़ा,और मकान।दरअसल जीना भी इन्ही की उपलब्धता पर निर्भर है और मरना भी इन्ही की अनुपलब्धता पर निर्भर करता है।अंदर , बाहर,एक के अंदर दूसरे के साथ ,खेत से खलिहान, गांव से शहर ,जल ,थल, नभ ,सबके साथ जो चल सकता है वह “रिश्ता”ही है, जी हां सिर्फ “रिश्ता “।क्योंकि यह हमारी प्रकृति है।समस्या अगर है तो रिश्ता बनाने की नहीं निभाने की है।वन,कृषि,औद्योगिक,सभ्यताओं ने , राष्ट्रों ने ,विविध संस्कृतियों ने कर्तव्य ,निष्ठा ,वचन,और भविष्य की व्यवस्थाओं के लिए “रिश्ते “नामक एक संस्था को जन्म दिया।हाथियों, डायनासोरो,ने भी “झुंड “बनाए होंगे।सांप ने भी “प्रेम” किया होगा।जल की रानी “मीन”/मछली, ने भी जल से रिश्ता कायम किया होगा।रिश्ता शब्द आते ही छायावादी कवि मचलने लगते हैं,और सर्वेक्षण प्रेमी सेक्सवाद प्रस्तुत कर देते हैं।मनुष्य इस पृथ्वी में सबसे प्रथम “मां “से रिश्ता बनाता है,फिर दुनिया भर से।जिंदगी रिश्तों का नाम है।कोई इतना खास हो जाता है की उससे जिंदगी भर का रिश्ता कायम हो जाता और किसी से लाख कोशिश के बावजूद पास होके भी करीब भी नहीं हो पाते।तभी तो अक्सर “हमसफर” कोई और “हमराज “कोई और।आखिर क्या है? “रिश्तों का रसायन “आइए जानते हैं। यूं तो रिश्ते कहते हैं कि स्वर्ग से बनकर आते हैं लेकिन उन पर अमल धरती पर होता है। हम उन्हें कितना जी पाते हैं परिस्थितियां तय करती हैं। रिश्तों का आधार विश्वाश है,समर्पण है।सुरक्षा ,आराम ,तथा खुशी तीनों के लिए किसी का साथ होना चाहिए, रिश्ते हर जगह हैं ।इस ब्रह्मांड में किसी भी चीज का अस्तित्व इसीलिए है क्योंकि हर एक वस्तु दूसरी वस्तु से एक रिश्ते से जुड़ी हुई है,अलग होकर वह अपना अस्तित्व खो देती है ।इसलिए हमें अकेले रहने और जीने का भ्रम, छोड़ रिश्ते जोड़ने का प्रयास करना चाहिए। वैज्ञानिक शोधों के मुताबिक संतुष्ट प्यार भरे रिश्ते “दवा “से ज्यादा असर दिखाते हैं। एक प्यार भरा रिश्ता व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में भी मदद करता है। यह रिश्ते ना केवल व्यक्ति के अकेलेपन को दूर भगाते हैं, बल्कि हमें किसी के लिए अति महत्वपूर्ण होने का एहसास कराते हैं ,जो जीवन में मुस्कुराते रहने के लिए जरूरी है ।रिश्ते हमारी जिंदगी में “प्रेरक “का काम करते हैं यह हमे निरंतर संपन्न बनाते हैं। जॉन बाउलबाई के अध्ययन के मुताबिक पहला स्नेही रिश्ता बहुत महत्वपूर्ण होता है,जो ताउम्र बराबर बना रहता है। पहला रिश्ता बच्चे का उसके देखभाल करने वाले के साथ होता है ,चाहे वह उसकी मां हो या फिर कोई और ।बच्चे जन्म के समय भावनाओं के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं। वे गुस्सा, उदासी , खुशी और भय जैसी भावनाएं जन्म के साथ ही उसके भीतर होती हैं।और जन्म के पहले आठ महीनों में वह इन्ही को करीब से महसूस करता है। मनोवैज्ञानिक और मानव विज्ञानी दोनों का मानना है कि जीवन में बनने वाले सभी रिश्तो में शब्दों से जायदा अशाब्दिक संवाद का महत्व होता है क्योंकि जन्म से ही हमारा मस्तिष्क भावनाओं और अशाब्दिक संकेतों को समझने में ज्यादा सक्षम होता है, भाषा उसके बाद में आती है। रेशम से भी नाजुक रिश्ते को ब्रिटिश समाज विज्ञानी जान बाउल ने एक “अटैचमेंट थ्योरी” के जरिए समझाया, अटैचमेंट थ्योरी के इस चैनल के मुताबिक जीवन में मनुष्य का प्राथमिक लक्ष्य कई लोगों से जुड़ना होता है,क्योंकि सिर्फ यही एक चीज है जो हमें सुरक्षा का आभास कराती है। असल में “करीबीजोड़ “मनुष्य की वास्तविक जरूरत है जो उसका जीवन भर विकास करती है, तभी तो मनुष्य एक सामाजिक प्राणी की तरह व्यवहार करता है।रिश्तो की केमिस्ट्री के पीछे आईए जानते हैं किसका हाथ होता है ।सामान्य बोलचाल में भी अक्सर कहा जाता है कि “उसकी केमिस्ट्री उसके साथ बहुत अच्छी है “,उसका रासायनिक बंध अर्थात “केमिकल बॉन्डिंग” उस अमुक व्यक्ति के साथ बहुत अच्छा है। “मेरी केमिस्ट्री उसके साथ नहीं बनती “आदि आदि।”भावनाएं “एक आकर्षक दुनिया हैं और हमें अभी भी बहुत कुछ पता है। कभी-कभी, हम उन लोगों से मिल सकते हैं जिनके साथ हमारी एक मजबूत रसायन (केमिस्ट्री)विज्ञान है, लेकिन हम इसके साथ आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं करते हैं। यह जानना महत्वपूर्ण है कि मजबूत संबंध स्थापित करने के लिए आकर्षण किस हद तक पारस्परिक है।प्यार या दोस्ती के क्षेत्र में, दो लोगों के बीच जो संबंध पैदा हो सकता है, वह आकर्षण है।”भावनात्मक रसायन ” यह तब होता है जब वे दुनिया के नक्शे और आपसी भावनाओं को पूरा करते हैं और साझा करते हैं।रिश्ता में दो लोगों के बीच अच्छी बॉन्डिंग फायदेमंद है, क्योंकि यह सुखद भावनाओं का उत्पादन करता है।वर्तमान को जीना, दिनचर्या का आनंद लेने की प्रेरणा,आशा,सहयोग,सहकारिता की भावना और किसी अन्य व्यक्ति के नक्शेकदम पर चलना बेहतर केमिस्ट्री के उदाहरण है।मनोविज्ञान भी दो लोगों के भावनात्मक रसायन शास्त्र को बखूबी समझता है।दो लोगों के बीच रसायन विज्ञान, संकेत, और एक दूजे के प्रति आकर्षण से पता चलता है।यदि दो लोगो में ,या समूह में, या समाज में इमोशनल केमिस्ट्री है,तो सम्मान और फिक्र और खयाल जरूर होता है।अक्सर बहुत मुद्दो पर सहमति रहती है। जब दो लोग सामान्य से अधिक करीब आते है तो उस व्यक्ति के साथ बात करते समय घबरा जाना, पुतलियों का पतला होना, बात करते समय किसी वस्तु के साथ फ़िदा होना, भी आकर्षण के लक्षण है,अच्छी केमिस्ट्री के लक्षण है। दो लोगों के बीच मानसिक संबंध तब स्पष्ट होने लगते हैं जब वे बात करना शुरू करते हैं और उन्हें पता चलता है कि वे कई हित साझा करते हैं। सामान्य वार्तालाप के साथ धीरे धीरे भावनात्मक बंधन और दूसरे में विश्वास मजबूत होता है। इसके अलावा, राय साझा करना संघर्ष और भविष्य की चर्चाओं से भी आपसी संबंध या बॉन्डिंग मजबूत हो जाती है।जिन लोगों के पास एक मजबूत रसायन विज्ञान (केमेस्ट्री)है वे व्यक्तिगत रिक्त स्थान साझा करने लगते हैं।एक रिश्ते में भावनात्मक रसायन विज्ञान के बहुत लाभ हैं भावनात्मक रसायन शास्त्र (इमोशनलकेमिस्ट्री)बहुत शक्तिशाली और फायदेमंद है। यह एक वास्तविक खजाना है, जो आपसी तालमेल को बढ़ावा देता है, ताकि एक रिश्ता अधिक और आगे बढ़े ।स्नेह ,से बंधन और मजबूत होता है। रिलेशनल बॉन्ड बनाने के लिए रसायन विज्ञान (केमेस्ट्री)को तीन प्रकारों में बांट सकते हैं,संबंध की प्रकृति के संदर्भ में परिभाषित कर सकते हैं: अच्छी केमिस्ट्री अच्छा तालमेल। कोई केमिस्ट्री नहीं, तालमेल बनाना मुश्किल लगता है। खराब केमिस्ट्री, कोई संबंध नहीं है या नकारात्मक तालमेल है। रसायन विज्ञान के विभिन्न अभिव्यक्तिया हैं यौन रसायन विज्ञान ,रोमांटिक रसायन विज्ञान, भावनात्मक रसायन विज्ञान, गतिविधि रसायन विज्ञान, टीम प्रदर्शन रसायन विज्ञान ,रचनात्मक रसायन विज्ञान ,बौद्धिक रसायन विज्ञान और सशक्तिकरण रसायन विज्ञान। किसी अन्य व्यक्ति के साथ केमिस्ट्री होने के विभिन्न मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और भावनात्मक लक्षण होते हैं इसे खुशी की भावना के साथ संयुक्त बुनियादी मनोवैज्ञानिक उत्तेजना के संयोजन के रूप में वर्णित किया गया है तंत्रिका तंत्र उत्तेजित हो जाता है जिससे व्यक्ति को तेज दिल की धड़कन ,सांस तेज चलना, और उत्तेजना होती है। शोध से पता चलता है कि हर कोई रसायन विज्ञान(केमेस्ट्री) का अनुभव नहीं करता है और यह की रसायन विज्ञान अक्सर उन लोगों के बीच होता है जो “जमीन से जुड़े” और “ईमानदार” हैं, ऐसा इसलिए है क्योंकि यदि कोई व्यक्ति स्वयं के साथ सहज है तो वह दुनिया के सामने अपने वास्तविक स्वरूप को बेहतर ढंग से व्यक्त करने में सक्षम होते हैं जिससे उन्हें यह जानना आसान हो जाता है भले ही महत्वपूर्ण मामलों पर “दृष्टिकोण” भिन्न हो। समानताओं को साझा करना रसायन विज्ञान के लिए भी आवश्यक माना जाता है क्योंकि “रिलेशनल बॉन्ड” बनाने के लिए समझा जाना आवश्यक है। रसायन विज्ञान को प्रेम ,वासना, मोह ,और किसी के साथ “घनिष्ठता” से जुड़ने की इच्छा के संयोजन के रूप में भी वर्णित किया जा सकता है। रिश्तों की प्रकृति संदर्भ में रसायन शास्त्र एक साधारण भावना है जो दो लोगों में तब मिलती है जब वह एक विशेष संबंध साझा करते हैं यह एक आवेग है। पश्चिमी समाज में रसायन शास्त्र को आमतौर पर रिश्ते के लिए उत्प्रेरक माना जाता है यानी इस रसायन शास्त्र के बिना कोई संबंध नहीं हो सकता है। रसायन शास्त्र रिश्ते की सफलता का एक मजबूत भविष्यवक्ता है। रिश्तों में पांच रसायनो का किरदार बड़ा अहम है ये हैं,असल में रिश्तो को शुरू करने का पहला संवाद हमारे शरीर में पाया जाने वाला एक रसायन करता है इसका नाम है फेरोमोन ।यह रसायन फेरोमोन वास्पशीलऔर सुगंधित रसायन है जो हमारे शरीर के “एपोक्राइन ग्लैंड” में उत्पन्न होता है फेरोमोन रसायन विपरीत लिंग के प्रति हमारे आकर्षण का कारण भी होता है।इस ग्लैंड की सक्रियता युवावस्था में शुरू होती है और यही कारण है कि इस उम्र के दौर में व्यक्ति अपने विपरीत लिंग वालों की तरफ अधिक आकर्षण महसूस करता है। फेरामोन को लोगों के बीच बनती “केमिस्ट्री” का कारण भी माना जाता है ,जब हम पहली बार किसी से मिलते हैं तो इस रसायन के कारण हम उसके प्रति रुचि ,अरुचि महसूस करते हैं ।कुछ शोधों के मुताबिक इंसान फेरामोन का प्रयोग अपने साथी को चुनने में करता है। जानवरों की दुनिया में इस रसायन की विशेष उपयोगिता है अलग-अलग जानवर अपनी प्रजाति के सदस्यों को एक विशेष संदेश भेजने के लिए इस रसायन का उपयोग करते हैं दरअसल इस रसायन से एक विशेष प्रकार की गंध आती है जिससे जानवरों को अपने साथी की उपस्थिति ,उसके उस विशेष स्थान से गुजरने का पता चलता है ।चीटियों और मधुमक्खियों में भी फेरोमोन रसायन उत्पन्न होता है ।जब चींटी परिवार के लिए भोजन खोजने निकलती है तो अपने पीछे पीछे एक गंध छोड़ती है, ताकि वह अपने घर का रास्ता ना भूले और अगर उसे भोजन मिल जाए तो उस गंध की मदद से सुबह फिर अपने साथियों के साथ पहुंच सके। फेरामोन का प्रयोग किस्सेकिस्से कहानियों में भी किया गया है । टॉम रॉबिंस के उपन्यास और फिल्म “लव पोशन नंबर नाइन” इसके चर्चित उदाहरण है।कुछ व्यावसायिक उत्पादक इस बात का दावा करते हैं कि उनके उत्पाद में सेक्स फेरोमोन हैं इसका उपयोग “कामोत्तेजक” के रूप में किया जा सकता है। डोपामाइन,यह रसायन लक्ष्य हासिल करने में मददगार होता है यह हमारी उपलब्धि से जुड़ा हार्मोन्स है। हमारे शरीर में इसकी मात्रा जितनी ज्यादा होगी हम उतना ही ज्यादा अपने काम पर फोकस बनाए रखेंगे ,यह रचनात्मकता और एकाग्रता बढ़ाने में मदद कर ता है, वास्तव में यह हमारे लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक प्रेरणा की तरह है, डोपामाइन हार्मोन सामाजिक एवं पेशेवर जीवन में हमारे निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाता है। ऑक्सीटोसिन, रसायन समर्पण और भरोसा बढ़ाता ऑक्सीटॉसिन काम में हमारा जुड़ाव बढ़ाता है यह दफ्तर या ऑफिस में ईमानदारी और भरोसा बढ़ाने में भी मदद करता है ,एक दूसरे सहकर्मियों से बेहतर संबंध के अलावा इससे हमारे तनाव का स्तर कम करने में भी मदद मिलती है ।हमऑक्सीटॉसिन का स्तर बढ़ाने के लिए दूसरों की मदद करें ,उत्साह बढ़ाएं, मार्गदर्शन करें और ऑफिस में लोगों की काम की तारीफ करें। सेरोटोनिन, नेतृत्व क्षमता बढ़ाता है यह नेतृत्व क्षमता से जुड़ा हार्मोन है यह हमारी नेतृत्व क्षमता विकसित करने में मदद करता है इससे हमारी ताकत बढ़ती है, आत्मविश्वास में वृद्धि होती इससे हमको आंतरिक संतुष्टि मिलती है और हमको अपना उद्देश्य पूरा होते हुए दिखाई देता है इससे हमारा तनाव आश्चर्यजनक रूप से घटता है जब हम अपनी नेतृत्व क्षमता बढ़ाने लगते हैं तो लोग हमारे उद्देश्य का अनुसरण करते हैं वास्तव में लोग हमारा आत्मविश्वास देखकर अनुसरण करते हैं। एंडोर्फिन रसायन दृढ़ निश्चयई बनाता है और खुश रखता है एंडोर्फिन हार्मोन वास्तव में हमको दृढ़ निश्चयई बनाने में मदद करता है इससे हमारा मूड बेहतर बनता है और शारीरिक दर्द एवं भावनात्मक तनाव घटता है इससे हमारा ज्ञान भी बढ़ता है इसके लिए हास्य गतिविधियां बढ़ानी चाहिए जब भी मौका होता है ठहाका लगाकर हंसना चाहिए।सार रूप में कह सकते हैं कि,संबंध ,रिश्ते,लगाव ,जुड़ाव ,प्रेम ,आसक्ति,स्नेह में सेरिटोनिन,ऑक्सीटोसिन,डोपामाईन,एड्रेनलिन,फेरामोन आदि रसायन रिसते हैं तभी तो रिश्ते हैं।

 

(( डॉक्टर रामानुज ))

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