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तीन तलाक कानून के 1 साल पूरे होने पर कानून मंत्री बोले- ‘हम मुस्लिम बहनों के साथ’

नई दिल्ली: मुस्लिम समाज की तीन तलाक जैसी कुरीति को खत्म करने वाले कानून को बनाए जाने के 1 साल पूरे होने के मौके पर केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसादने कहा है कि ये संतोष कि बात है कि कानून बनने के बाद मामले काफी कम हो गए हैं.
जब रविशंकर प्रसाद ने पूछा गया कि एक साल होने पर सरकार के लिए ये कितनी बड़ी उपलब्धि है तो उन्होंने कहा कि आज हमें खुशी भी है और पीड़ा भी. जब 20 इस्लामिक देशों ने तीन तलाक नियंत्रित कर लिया था तो भारत को 70 साल क्यों लगना पड़ा? फिर भी इतना विरोध? मुझे अपने प्रधानमंत्री पर गर्व है, जिन्होंने कहा कि बिल्कुल खड़े हो जाओ खावतीनो के साथ, सुप्रीम कोर्ट के अंदर भी और बाहर भी. कानून मंत्री ने कहा कि हमने बार-बार कहा कि ये सवाल ना तो पूजा का है और ना ही प्रार्थना का बल्कि ये सवाल नारी गरिमा का है. आज नारी स्वाभिमान का 1 साल हुआ है और जो खवातीन हैं, जो मुस्लिम बहने हैं उन सबकी मैं हौसला अफजाई करूंगा, वो हिम्मत से खड़ी रहीं. बड़े संतोष का विषय है कि आज संख्या में कमी आई है.
उन्होंने आगे कहा कि तीन तलाक के मामलों में कमी आने के पीछे की वजह कानून में नॉन बेलेबल वारंट का प्रावधान होना है. इसके अलावा बेल में सुनवाई के लिए पत्नी की सुनवाई होनी जरूरी है. हमारी सरकार तो नारी न्याय के प्रति वचनबद्ध है, उसमें अगर ये डेवलपमेंट हुआ है तो ये संतोष की बात है. इसी तरह हम नारी न्याय के लिए काम करते रहेंगे.
जब रविशंकर प्रसाद ने पूछा गया कि इस कानून के बाद तीन तलाक कि घटनाओं में पूरी तरह से बंदिश कैसे लगे तो वो बोले कि लोगों को जागरूक करने की जरूरत है और जागरूकता के लिए कानून की ढाल भी जरूरी है, कानून की ढाल बनी तो चीजें बदलीं. हमें लगता है कि हम सभी मिलकर जागरूकता बढ़ाएंगे. समाज में जागरूकता लाने के लिए समाज के अंदर काम करेंगे तो स्थिति और अच्छी होगी.
तीन तलाक कानून का कांग्रेस के उस समय संसद के अंदर और बाहर विरोध करने को रविशंकर प्रसाद ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया. उन्होंने कहा कि मुझे एक ही बात की पीड़ा हुई कि कांग्रेस पार्टी का दृष्टिकोण समझ नहीं आया. संसद में तीन राउंड इस पर चर्चा हुई, उन्होंने एक बार सपोर्ट किया, दूसरी बार वॉक आउट किया और तीसरी बार विरोध किया. नारी न्याय के नाम पर ऐसी पार्टियां जिनकी नेता देश की प्रतिष्ठित नेत्री हैं, उनके ऊपर शाहबानो से सायरा बानो तक वोट बैंक हावी है. ये पीड़ा की बात है लेकिन खुशी की बात है कि महिलाएं आगे आ रही हैं.

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