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बिमला काव्य मंच की ऑन लाइन काव्य गोष्ठी सम्पन्न

डॉ शम्भू पंवार। विजय न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। लॉक डाउन के चलते इनदिनों ऑन लाइन कवि गोष्ठियों का दौर जोर शोर से चल रहा है।बिमला काव्य मंच की “महफ़िल मित्ररा दी”की ऑन लाइन तीसरी गोष्ठी बड़े उत्साह और हर्षोउल्लास से सम्पन्न हुवी।
इससे पहले “कोरोना वायरस”पर,दूसरी ” एक शाम पीएम के नाम “और तीसरी गोष्ठी का “नारी शक्ति और पालघर कांड” बिषय रहा।काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता प्रसिद्ध कवयित्री संगीता गोयल ने की। इस अवसर पर संगीता गोयल जी ने कहा देश इस समय कोरोना वायरस के कारण बहुत संकट के दौर से गुजर रहा है,इससे बचाव ही एक मात्र सही उपाय है। सभीअपने घर में रहें और सुरक्षित रहें, हम सभी की समाज के प्रति कुछ जिम्मेदारी होती है जिसका सभी को पालन करना चाहिए।

संगीता गोयल ने पालघर की घटना पर कहा:
पालघर की क्रूरता पर क्या कोई भी शर्मिंदा है ?
क्या लगता है लोगों में मानवता कोई जिंदा है?
लानत है धिक्कार,अधर्मियो, निहत्थो पे वार किया,
आज यहाँ पर तुमने मानवता पर ही प्रहार किया।।

आभा साहनी ने रचना सुनाई :-
संस्कारों के नाम पर तूने ही तो बंदिशे झेली है !
कितनी बार परम्पराओं में तेरी इच्छाएँ दबी है !!,

कवयित्री सुषमा शैली ने रचना सुनाई:-
बढ़ रहा कालिकाल में दानवों का भार है
रक्षक तो सब भक्षक हुए , कौन पालनहार है,
राम की धरती कलंकित , सत्य भी खोया ….
को काफी दाद मिली।

राशि श्रीवास्तव  की रचना की पंक्तिया:-
फूलों सी नाजुक और प्यारी होती बेटियां चिड़ियों सी चहचहाहती महकती है बेटियां,
ने बहुत वाही वाही बटोरी।

कवयित्री मिलन सिंह ने पाल घर की घटना पर कहा:-
अरे पापियों तुमने लहू फिर बहाया।
पड़ी पालघर पर निशाचर की छाया।
हुआ संतों का वध नहीं हाथ काँपे…

पंचकूला से गरिमा जी ने अपनी रचना सुनाई:-
हे प्रभु आपसे आशा करें हम हर रोज़
उम्मीद का हमें कुछ ऐसा दीजिये तोड़…

नीरू मित्तल ने कहा:
कौन कहता है मौत दबे पाँव आती है ये मौत है जनाब ये तो खरीदी और बेची जाती है, अंत मे गोष्ठी की संयोजिका संगीता गोयल ने सभी का आभार जताया।

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