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रक्षामंत्री की प्रशंसा पाने वाले पीलीभीत डीएम ने नहीं माना उपमुख्यमंत्री का आदेश

  • पुराने जमीन विवाद के निस्तारण को ओएसडी ने चार बार किया डीएम को फोन
  • एसडीएम ने उठाया मौका का फायदा, डिप्टी सीएम के नाम से आरोपी से वसूला मोटा माल

डॉ रमेश ठाकुर/विजय न्यूज नेटवर्क।

पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के नौकरशाह बेलगाम हैं, इसका एक उदाहरण और सामने आया है। पीलीभीत के डीएम ने उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के आदेश को मानने से इनकार करते हुए सिरे से नकार दिया। याद हो ये वही डीएम साहब हैं जिन्होंने स्क्रिप्ट के तहत कुछ माह पहले किसानों से थान खरीद की अनिमितताओं में पीलीभीत मंडी के ठेकेदारों को हड़काकर वाहवाही बटोरी थी।
मीडिया की सुर्खियाँ में आकर गुब्बारे की तरह फूल गए थे। तब उत्तेजित होकर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी डीएम पुलकित खरे की पीठ थपथपाई थी। बस यहीं से डीएम साब बौरा गए, तभी से सबको घासफूस समझने लगे। जिले की जनता और फरियादियों को तो कीड़े मकोड़े मानने लगे।
वैसे, उनका अकड़ना ठीक भी है,भला जिस डीएम से रक्षामंत्री स्वयं बात करते हों, फिर उसके समक्ष उपमुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक व सरकारी बॉडी के सदस्य की क्या औकाद जो उनसे आंख भी मिला सके, काम की सिफारिश करना तो दूर की बात।

कौन से मामले में उपमुख्यमंत्री ने किया था आदेशित

पीलीभीत की तहसील पूरनपुर में एक जमीन का विवाद चल रहा है। विवाद केंद्रीय जनसहयोग एवं बाल विकास संस्थान, भारत सरकार के सदस्य डॉ. रमेश ठाकुर से संबंधित है। उन्होंने विवाद निपटाने के लिए पहले खुद डीएम से निवेदन किया। पर, वह टालमटोल करते रहे। तभी रमेश ठाकुर ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को घटना से अवगत करवाया। डिप्टी सीएम ने अपने ओएसडी से डीएम से बात कर विवाद को निस्तारण करने का आदेश दिया। उपमुख्यमंत्री कार्यालय से एक बार नहीं बल्कि चार बार डीएम को आदेशित किया गया। लेकिन डीएम ने रुचि नहीं ली। बस उतना किया संबंधित मामले को एसडीएम को फॉरवर्ड कर दिया। एसडीएम राजेंद्र प्रसाद मामले से पहले से परिचित थे, उनको माल काटने का और मौका मिल गया। आरोपी पक्ष को उपमुख्यमंत्री के नाम पर जमकर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। उसने बोले मामला लखनऊ तक पहुंच गया है, खेत का बंटवारा करना होगा। दरअसल, आरोपी पक्ष चाहता ही नहीं खेत का बंटवारा हो, ऐसा नहीं करने पर एसडीएम ने उनसे मोटा माल काटा। एसडीएम की हरकतों से भी उपमुख्यमंत्री कार्यालय को अवगत कराया गया। उसके बाद सीधे एसडीएम को उपमुख्यमंत्री के कार्यालय से मामले का निस्तारण के लिए बोला गया। उन्होंने भी गच्चा दे दिया। क्योंकि डीएम-एसडीएम दोनों की मिलीभगत थी, दोनों ही मामले को निपटाना नहीं चाहते।
आरोपी दोनों अधिकारियों को कई किस्तों में मोटा माल खिला चुका है। मामले का तूल पकड़ने और ज्यादा दवाब बढ़ने से एसडीएम राजेंद्र प्रसाद ने पीड़ित पक्ष को कार्यालय में बुलाकर धमकाया और बोले, जिस उपमुख्यमंत्री से सिफारिश करा रहे हो, वह खुद चंद दिनों के मेहमान हैं। कुर्सी जाने वाली है। उसके बाद वह भी मेरे दफ्तर के बाहर खड़े दिखाई देंगे। एसडीएम ने आरोपी पक्ष को बुलाया और उनसे कहा कि जमीन को कुर्क के लिए पुलिस को 145 की करवाई को आदेश दे रहे हैं। इस पर पीड़ित पक्ष तो राजी हो गया, लेकिन 145 कि करवाई के नाम पर आरोपी से एक बार और मोटा माल काटने का मौका मिल गया। एसडीएम ने अपने पेशकार विमल सक्सेना के जरिए मोटी रिश्वत हड़पी। एसडीएम ने पीड़ित पक्ष को कहा कि वह पुलिस थाने में थानेदार से मिले, वो ही 145 कि करवाई करेंगे। अब थानेदार पीड़ितों को महीने भर से चक्कर कटा रहे हैं। बता दें, एसडीएम राजेंद्र प्रसाद के घुस लेने के चर्चे आम हैं, रोजाना अवैध खनन माफिया ओं से उनका पेशकार मोटा माल वसूलता है। फरियादी उनके पास किसी काम के लिए जाते हैं, तो लॉकडॉउन या कोर्ट बंद होने का बहाना बनाकर टरका देते हैं। हाल में आलोक शर्मा नाम के एक अधिवक्ता से भी एसडीएम भिड़े थे, घटना के खूब चर्चे हुए थे। आलोक शर्मा किसी काम के लिए उनके पास पहुंचे थे, नहीं किया तो दोनों में काफी झड़प हुई थी। ऐसी झड़पें एसडीएम के लिए आम हैं रोजाना लोग उनसे झगड़ते रहते हैं। लोग उनके मुहं पर बोल देते हैं कि।एसडीएम साहब आप चपरासी के भी लायक नहीं हैं। एसडीएम कार्यालय में रिश्वत का खेल उनके पेशकार विमल सक्सेना द्वारा खेला जाता है। बात दें, ऐसे अधिकारियों की कारगुजारियों के चलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि खराब हो रही है। हाल ही में बरेली मंडल में मुख्यमंत्री ने दौरा किया था, तब मंडल के सभी जनप्रतिनिधियों ने उनसे अधिकारियों द्वारा बात नहीं सुनने को लेकर सामूहिक रूप से शिकायतें की थी। काम में गुणवत्ता नहीं मिलने पर हाल ही में मुख्यमंत्री ने दो एसडीएम का डिमोशन भी किया है।

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