National Hindi Daily Newspaper
ब्रेकिंग न्यूज़

कविता: आशिक

पल दो पल का साथ हमारा
पल दो पल की बाते हैं।।

भूल चुका अब सबकुछ
वो घुंधली धुंधली सी यादें हैं।।

आयी विरह की रात काली
वो मस्त मतवाली यादें हैं ।।

वो अलबेली बात का जादू
वो खिलखिलाती बातें हैं ।।

जैसे अल्हड़पन तेरा था
वैसी ही तेरी मुलाकातें है।।

बात है अपनी जहाँ की
वो सौगात की शामें है।।

वो शोहरत दौलत की
अपनी तो विरह की रातें हैं।।

खूब चला रूप का सिक्का
अब तो सूनी सूनी सांसे हैं।।

दिल परेशान हो चला अब
फिर भी हम तेरे आशिक हैं ।।

 

Print Friendly, PDF & Email
Tags: ,
Skip to toolbar