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कविता : अभिनंदन नव वर्ष

अभिनंदन नव वर्ष
अभिनंदन तुम्हारा
वंदन बारम्बार।
नयन बिछाये खड़े हुए
हम लिये हृदय में प्यार।
आओ कुछ नया संकल्प करें
मिटाएं बैर और भेदभाव
नव वर्ष के हे प्रभात
दो सबको अच्छी सौगात।
अश्रु हर्ष के बहने को
बेताब चमन में देख ।
उमड़ रहे है मेल सभी के
चंदन सा ढूढें अंर्तमन का सार।
विश्वशांति के लिए हमसब में
गहरा हो चिंतन संकल्पी विचार।
भुला बैर मतभेद सभी जन
मंगलमय हो गाँव गली घर द्वार ।
विगत वर्ष के जख्म भुला हम
इक दुजे को सदबुद्धि दे अपार।
यह युग आया भारती दे दे शक्ति
भगवान तुम्हें वंदन बारम्बार।

मंगल व्यास भारती
गढ़ के पास , चूरू राजस्थान

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