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कविता : कोरोना पर देश से अपील

कोरोना पर देश से अपील


देश को बचाने का प्रयोग मिलके कीजिए
विपदा की घड़ी है ये सहयोग मिलके कीजिए

ना कोई गुमराह हो , ज्ञान के अभाव में
बदलाव की जरुरत है अपने स्वभाव में
गंदगी में न रहें और , न रहें तनाव में
देश का बचाव निहित अपने ही बचाव में
स्वच्छता, सजगता का उद्योग मिलके कीजिए
विपदा की घड़ी है ये सहयोग मिलके कीजिए

बरतें सावधानियां हम, न कोई भी फर्क हो
बेवजह बहस नहीं हो, ना कोई कुतर्क हो
रोग जनित कारकों, से नहीं सम्पर्क हो
मिलके रहें सावधान और सभी सतर्क हों
विवेक दिया ईश ने , उपयोग मिलके कीजिए
विपदा की घड़ी है ये सहयोग मिलके कीजिए

बचाव में हर एक कदम, पुनीत चाहिए हमें
हर तरफ सतर्कता , प्रतीत चाहिए हमें
हताहत न कोई भी, पीडि़त चाहिए हमें
पार इससे पाना है , जीत चाहिए हमें
जीत पाने में मदद, सबलोग मिलके कीजिए
विपदा की घड़ी है ये सहयोग मिलके कीजिए

विक्रम कुमार
मनोरा, वैशाली

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