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कविता : अपनी खुशी के लिए मत जियो

सिर्फ़ अपनी खुशी के लिए मत जियो
ज़िंदगी के सिर्फ गम मत पियो।
नही जरूरी धनदौलत जीवन में
दिल में प्यार का सागर भरपूर रखो।
किसी गरीब के हर लो दुख
ऐसा कोई कर ही लो।
जो कुंठित बिना वजह से
गांठ उसकी धीरे से खोल लो।
न ज्यादा प्रफुलित हो ख़ुशी से
गम को भी अहमियत उतनी दो।
पाने में जिसे पीड़ा अधिक हो
उस जिद तो कही ओर रख दो।
समय किसी से बंधा नही है
बांधने की कोशिश छोड़ दो।
दूर करो गीले शिकवे सब
आपस गले मिल के दूर कर दो।

मुकेश बिस्सा
जैसलमेर

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