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कविता : मुझे तुम याद आते हो

मुझे तुम याद आते हो


मेरे हर गीत को पढ़कर
जब थोड़ा गुनगुनाते हो
देखकर दृश्य मनभावन
मुझे तुम और भाते हो..।।

दूर जाकर भी जब मुझसे
तुम अपनापन जताते हो
भूल जाता हूँ हर गम मैं
मुझे तुम याद आते हो..।।

मेरी उलझन को सुलझाकर
जब तुम यूं मुस्कुराते हो
मुझें मिल जातीं हैं खुशियां
जब तुम मुझको हंसाते हो..।।

सृजन रिश्तों का अच्छा हो
यही है कामना मन की
कभी अच्छा भी लगता है
मुझे जब तुम सताते हो..।।

नहीं तुम साथ हो मेरे
मगर अहसास तेरा है
बहुत अभिमान होता है
जब तुम रिश्ता निभाते हो..।।
जब तुम रिश्ता निभाते हो..।।

विजय कनौजिया

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