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कविता : सहमा हुआ हूँ मैं

 सहमा हुआ हूँ मैं


परीक्षा प्रेम की इतनी
सहज होती नहीं शायद
सही परिणाम की आशा
की कोशिश में लगा हूँ मैं..।।

कभी उत्तीर्ण हो जाऊं
यही है कामना मन की
तभी तो प्रेम पाठन में
हमेशा से लगा हूँ मैं..।।

प्रेम की हर विषयसूची
का अवलोकन जरूरी है
प्रेम की इस गणितीय सूत्र में
उलझा हुआ हूँ मैं..।।

ना जाने कितनी प्रेम की
परिभाषा लिख डाला
फिर भी प्रेम संदर्भ में
अटका हुआ हूँ मैं..।।

उत्तीर्ण और अनुउत्तीर्ण की
जद्दोजहद में मैं
निकलेगा क्या परिणाम अब
सहमा हुआ हूँ मैं..।।
सहमा हुआ हूँ मैं..।।

विजय कनौजिया

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