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कविता : भारतवासी एक हुए

भारतवासी एक हुए


जीवन पद्धति बिगड़ गई सब
उपचार सभी असहाय हुए
मानव की मानव से दूरी
ऐसे अब हालात हुए..।।

आज अकेलेपन की पीड़ा
ऊपर से कोरोना भय
बिना जुर्म ये सजा मिली है
कमरे में सब बंद हुए..।।

देश हमारा फिसल गया है
दिनचर्या की पटरी से
जो करते थे नारेबाजी
न जाने अब कहाँ गए..।।

सभी धर्म मज़हब की बातें
अब किसको हैं याद भला
देश बांटने वाले भी अब
डर के मारे दुबक गए..।।

नहीं कल्पना थी जीवन में
ऐसा दिन भी आएगा
सांसें भी अब सहम गई हैं
सबके सब लाचार हुए..।।

करें प्रार्थना मिलकर हम सब
समाधान कुछ मिल जाए
चलो दिखा दें दुनिया को हम
भारतवासी एक हुए..।।
भारतवासी एक हुए..।।

विजय कनौजिया

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