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कविता : जग की फुलवारी

जग की फुलवारी

आओ मिल हम पौधा लगाएं,
जग की फुलवारी को महकाएं।

धरती को बना कर हरा भरा,
सारे जगत में हरियाली फैलाएं।

पेड़ पौधे हैं श्रृंगार धरती के,
वसुंधरा को हम इनसे सजाएं।

कभी मिलता हमें फल-फूल
कभी पेड़-पौधों से छाया पाएं।

तिहाई धरती पर पेड़ लगाकर
अपनी मातृभूमि को स्वर्ग बनाएं।

वातावरण को प्रदूषण मुक्त कर
पर्यावरण को हम स्वच्छ बनाएं।

आहार तालाब नदी पोखर को
संरक्षित कर के हम जल बचाएं।

खाली जगहों में पेड़ लगाकर,
धरती पर वर्षा समय से बुलाएं।

एक पेड़ कटे तो दस लगाकर,
धरती पर जंगल का क्षेत्र बढ़ाएं।

पेड़ पौधों से मित्रता करके,
पर्यावरण को जीने लायक बनाएं।

गोपेंद्र कुमार सिन्हा गौतम
देवदत्तपुर पोस्ट एकौनी थाना दाउदनगर
औरंगाबाद बिहार 82 4113
व्हाट्सएप नंबर 950 734 1433

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