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कविता : जीवन

जीवन इक खोज है
दर्द इसमें रोज है

कुछ दिल में उल्लास हैं
कुछ का आलम उदास है

बस जुठ का रहवास है
हर को नही रास है

मुश्किल लेना अब सांस है
यहां आदमी बदहवास है

कभी धन की प्यास है
कहीं धन का नाश है

सोचता हूँ मै भी अब
आता कोई नही सबको रास है

जीवन सुख संग दुख का वास है।
फिर भी जीने की आस है

मुकेश बिस्सा
केंद्रीय विद्यालय,वायुसेना स्थल
जैसलमेर

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