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कविता : प्रेम

शब्दो के भाव जरा कम
उठाया कीजिए

रिश्ते टूट जाया करते हैं
छोटी छोटी बातों पर
दामन छूूूट जाया करते हैं

मिलते ही नजरे मोहब्बत का
पैगाम लाती हैं पर
वादे तोड़ जाया करते हैं

माना कि हम तुझे चाहते बहुत है
आप भी ना जाने क्यो
मेरेे भाव से बेभाव हो जाते हैं।

गुलशन पाण्डेय

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