न्यूज के लिए सबकुछ, न्यूज सबकुछ
ब्रेकिंग न्यूज़

कविता : नववर्ष उज्जवल भविष्य

नववर्ष उज्जवल भविष्य ले आ रहा
नववर्ष उल्लास उमंगे.
लाने आ रहा.
स्वणिम सुख स्वप्न
संजोए जाने आ रहा।
रंगीन कल्पनाओं के दीप.
जाने आ रहा.
आँखों में मंद पड़ा हास.
जगाने आ रहा।
उल्लास समाया धरा के.
उर में जाने आ रहा.
देखो न ई आशा भर छाती.
ताने आ रहा।
दुख के गहरे बादल.
संसार से हटाने आ रहा.
आतंक भ्रष्टाचार बीमारी को.
घटाने आ रहा।
जन जन के मानस में.
देखो छाने आ रहा.
मनमोर मुदित हो नाचे.
सुखी बनाने आ रहा.
देखो प्रेम सुधा जीवन में.
बरसाने आ रहा।
भारती गद गद तन मन .
जीवन सुखी बनाने आ रहा.
अपना उज्जवल भविष्य चरित्र.
बनाने आ रहा।

मंगल व्यास भारती
गढ़ के पास , चूरू राजस्थान

Print Friendly, PDF & Email
Skip to toolbar