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कविता : प्रण स्वच्छ भारत का

स्वच्छ भारत के स्वप्न को
सबको मिलकर पूरा करना है।
देश कि प्रगति को तो अब
हमको ही हासिल करना है।
है लक्ष्य तो दूर बहुत
हिम्मत से आगे बढ़ना है।
राष्ट्र की इस पीढ़ी को अब
निर्बाध गति से चलना है।
घर आंगन शाला मौहल्ला
साफ हमें अब करना है।
आओ मिलकर संकल्प करें
कूड़ेदान का ही प्रयोग करें।
वतन के हर हिस्से को स्वच्छ
कर आओ नया इतिहास रचें।
स्वच्छ भारत के एक स्वप्न को
आओ मिल कर साकार करें।
नौनिहालों को आरम्भ से हम
स्वच्छता का अब ज्ञान दें।
स्वच्छ्ता की कसौटी पर देश
तभी स्वस्थ भारत कहलायेगा।
फैली अनेक बीमारियों से
ये अभियान मुक्ति दिलाएगा।
साफ सुथरा हो देश हमारा
साकार हो ये प्रण सारा।

मुकेश बिस्सा
प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक(गणित)

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