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कविता : मन की बात

मन की बात बताना चाहता हूं मैं
गीत प्यार के सुनाना चाहता हूं मैं
सपने की दुनिया देखना चाहता हूं मैं
ख्वाब सच करना चाहता हूं मैं
करीब नजरों के तुझे लाना चाहता हूं मैं
अधूरे वादे पूरे करना चाहता हूं मैं
पुरानी यादों में जाना चाहता हूं मैं
दुनिया को आजमाना चाहता हूं मैं
प्यार के पल का लुत्फ उठाना चाहता हूं मैं
अपने जज्बे से जीना चाहता हूं मैं
करीब अपने बुलाना चाहता हूं मैं
जीवन की पहेली सुलझाना चाहता हूं मैं
पल सुकून के जीना चाहता हूं मैं

मुकेश बिस्सा
श्री कन्हैया कुंज,4 नवखुनिया,गांधी कॉलोनी
जैसलमेर

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