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कविता : गणतंत्र दिवस पर मिलके कसम उठाएं

दिल में रखें स्नेह सदा ही , गीत प्रेम के गाएं हम
आओ इस गणतंत्र दिवस पर मिलके कसम उठाएं हम

कसमें ऐसी कि जिसमें हो सर्वोपरी भारत माता
देशप्रेम, सौहार्द बने हर हिंदी का बलदाता
एकता और अखंडता से बढ़कर कुछ भी न हो
अपनी प्यारी भारत माता से उपर कुछ भी न हो

जात धरम के सब झगडो़ं का पूरा भरम मिटाएं हम
आओ इस गणतंत्र दिवस पर मिलके कसम उठाएं हम

अपने कसमों में नैतिकता का भी हिस्सा ज्यादा हो
एहसास सदा हो कर्तव्यों का बनी सदा मर्यादा हो
अन्यायों के आगे हरदम प्रखर बनी आवाज रहे
समभावों का प्रचलन हो सद्भावों का राज रहे

जो भाईचारा लिखे दिलों पर वही कलम उठाएं हम
आओ इस गणतंत्र दिवस पर मिलके कसम उठाएं हम

मीठी वाणी विनम्रता का उपयोग करेंगे हम
देश को आगे लाने में पूरा सहयोग करेंगे हम
हम जन्में हैं इस माटी में माटी को हम न भूलेंगे
वीर भगत बलिदानी की परिपाटी को हम न भूलेंगे

एक ही नारा जय हिंद और वन्दे मातरम लगाएं हम
आओ इस गणतंत्र दिवस पर मिलके कसम उठाएं हम

विक्रम कुमार
मनोरा, वैशाली

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