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कविता : इस होली तुम …..

इस होली तुम …..

सुनो,
इस होली तुम खूब हंसना गाना
मन में आए वो गुनगुनाना
मस्त हो जो चाहे वो करना
सुख का घोड़ा चहुँ ओर दौड़ाना
सुनो साथ मुझे भी ले चलना
होली के बहाने ही सही
अपने व्यस्ततम जीवन से
कुछ फुरसत के पल चुरा कर
मस्ती का आलम चारों ओर बिखराना
सुनो इस होली खूब हंसना गाना
होली के बहाने ही सही
अपने दुखों को तिलांजलि दे
कण-कण में अबीर गुलालकी
महक उड़ाना और कहना
होली आई रे उड़ा रे गुलाल
मस्ती छाई रे बिखरा रे गुलाल
जर्रे-जर्रे में प्रेम का रंगबिखरा
मन को अपने मधुबन बना खूब महकाना
सुनो इस होली खूब हंसना गाना
मस्ती से सब प्रियजन को गले लगा सारे कटु भाव भुला
द्वेष को मन से निकाल
जीवन की लय में अबीर उड़ा
अपने जीवन को इंद्रधनुषी बनाना
सुनो
तुम इस होली तुम खूब हंसना गाना

रेनू शब्दमुखर
जयपुर

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