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कविता : नजारा बदलने वाला हैं

 नजारा बदलने वाला हैं


कुछ दिनों में ये नज़ारा भी बदलने वाला है
ये देश,राज्य और शहर भी बदलने वाला है।

हम बदल देंगे रास्ता इस कोरोना का
किसी दिन वीराना भी बदलने वाला है।

हमने बना ली दूरी सामाजिकता की
वक़्त बदलते सब कुछ बदलने वाला हैं।

मान ली हार चीन,ईरान इटली संग यूरोप ने
लेकिन हमारा मुकाबले का ढंग बदलने वाला है।

अफवाहों के उलटफेर में हमें नहीं पड़ना है
रात ढलते ढलते मंजर भी बदलने वाला है।

मुकेश बिस्सा
श्री कन्हैया कुंज, 4 नवखुनिया, गांधी कॉलोनी
जैसलमेर

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