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कविता : आवाजें

ताकत हैं आवाजें
मद्धिम-सी आवाजें
दबी-दबी सी आवाजें
जो अभी गूंज रही हैं
नक्कारखाने में तूती की तरह
आवाजें…..
आवाजें ही होती है
यही आवाजें…
मादा रखती हैं
देश और दुनिया को बदलने का….
यही आवाजें…
बदलेगी दशा और दिशा
दिखाएंगी आइना
तमाम ऐसी वैसी ताकतों को!!!

कृष्ण कुमार निर्माण

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