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लक्ष्य की ओर चलना है

तुम संग साथ चलो तो
चार कदम भी बढ़ना है
हर अंधेरे से लड़ना है
लक्ष्य की ओर चलना है

प्यार बनकर ही रहना है
मैं प्यार बनकर ही पलना है
तुम ज़रा साथ दो तो
लक्ष्य की ओर चलना है

यदि पड़े ढलना मुझे
तो सूर्य-सा ही ढलना हैं
तुम जरा हाथ थाम दो तो
लक्ष्य की ओर चलना है

सत्य की राह मेरी
जिस पर मुझे चलना हैं
हर अंधेरे से लड़ना है
एक दीपक-सा जलना है
लक्ष्य की ओर चलना है

मुकेश बिस्सा
श्री कन्हैया कुंज,4 नवखुनिया
गांधी कॉलोनी,जैसलमेर

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