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कविता : हम अनेक में एक

हम अनेक में एक


धन्य धन्य है भारतवासी धन्य धन्य है देश
धन्य धन्य संस्कृति अपनी धन्य धन्य परिवेश

‘सर्वे भवन्तु सुखिन:’ का मंत्र सदा अपनाया
जब भी संकट आया मिलकर साथ निभाया

ये ही तो पहचान हमारी हम अनेक में एक
सदियों की इस परंपरा को विश्व रहा है देख

सृष्टि के हर जीव की चिंता सदा रही सताई
तब जाकर भारत माता ‘विश्व-गुरु’ कहलाई

एक जुटता बनी रहे सबकी सुबुद्धि दे सहारा
कोरोना हो या फिर कोई क्या कर लेगा हमारा

व्यग्र पाण्डे
गंगापुर सिटी (राजस्थान)
मोबाइल नंबर – 9549165579

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