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कविता : ज़िंदगी क्या है ?

सांसो का एक हिसाब है जिंदगी
पलों की एक किताब है जिंदगी
कुछ उम्मीदें अधूरी
कुछ मन्नतें पूरी
कभी सुख की बारी
कभी दुख की बारी
कभी मदमस्त बसंत
कभी तेज सी तपन
कभी अपनों के संग
कभी परायों के संग
कभी अमीरी का नशा
कभी गरीबी की दशा
कभी खिलखिलाता बचपन
कभी सुनसान सा यौवन
कुछ इन्ही सवालों का हिसाब है जिंदगी।

मुकेश बिस्सा
जैसलमेर

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