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कविता : बन जाएगा

आस गर है तो विश्वास बन जाएगा
ये सफर भी बहुत खास बन जाएगा
ये कहानी है जब तक मिलते न हम
मिल गए जो तो इतिहास बन जाएगा

प्रेम तो इस जहां में है अनमोल सा
इसकी कोई जमाने में कीमत नहीं
प्रेम निभता सदा दिल से ही प्रिय
लगता इसको निभाने में दौलत नहीं

ये जो पलता हुआ दर्द है सीने में
खुद ही मीठा सा एहसास बन जाएगा

मैं भी माटी से सोने सा हो जाऊंगा
बंध जो जाओ मोहब्बत के बंधन में तुम
मेरा जीना मुकम्मल सा हो जाएगा
मेरी बनके जो आ जाओ जीवन में तुम

आ गए जो अगर मेरे ख्वाबों में तुम
सच्चा हर एक आभास बन जाएगा

विक्रम कुमार
मनोरा, वैशाली
मो. नंबर – 6200597103

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